जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा

 जोड़ों का दर्द 

जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा

जोड़ो का दर्द मतलब की joint pain या  घुटने  में दर्द  का होना .यह  समस्या अधिकतर बड़ी उम्र के लोगो को होती है, जो  लगभग  70% लोगो  में  कैल्शियम की कमी के कारण होता है, व्  30 % लोगो में कोई अन्य कारण  हो  सकता. जोड़ो का दर्द चलने व् घूमने पर और अधिक बढ़ जाता है. हम यहाँ पर जोड़ो के दर्द की आयुर्वेदिक दवा के बारे में पड़ेगे जिसे अपने घरेलु नुस्खे से अपने घर पर ही जोड़ो के दर्द का घरेलू उपचार करके जोड़ो के दर्द की आयुर्वेदिक दवा बना सके और जोड़ो के दर्द को ठीक किया जा सके 

ग्रंथि वात नाशक बटी:
जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवा 

जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवा "ग्रंथि वात नाशक बटी" का नाम पहले नंबर लिया जाता है है जो घरेलु नुस्खे से जड़ी बूटियों की मदद से आसानी से बनाई जा सकती है और इस दवाई को उपयोग गठिया जैसी समस्याओं का इलाज करने के लिए भी किया जाता है  यह आयुर्वेद का जोड़ो के दर्द के लिए रामबाण इलाज माना जाता है

 ग्रंथि वात नाशक बटी के बनाने के बहुत से अलग अलग तरिके है पर हम यहाँ केवल दो तरीको को जानेगे जो  जोड़ो के दर्द व् गाठो के दर्द के साथ और भी कई प्रकार के रोगो को दुर करने में मदद करेगा आपको जो घरेलू नुस्खा अच्छा या सरल लगे आप उसे अपना घरेलू उपचार कर सकते है  ।

ग्रंथि वात नाशक बटी क्या है 

ग्रंथि वात नाशक बटी एक आयुर्वेदिक दवा है जिसको प्राकृतिक जड़ीबूटियां को मिला कर बनाया जाता है इसमें मुख्या तोर पर गुग्गुल, शल्पर्णी, आमला, गुडूची, गुडमार और अन्य औषधीय पौधों होते है ,जो किसी भी पंसारी की दुकान पर  आसानी से उपलब्ध होते है यह प्राकृतिक उपाय होता है जो शारीरिक स्नायुविकार को समाता है और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है

 लाभ और उपचार 

  1.  गठिया रोग में और जोड़ों के दर्द: इस बाटी का उपचार गठिया रोग में और जोड़ों के दर्द में किया जाता है जो दर्द में राहत प्रदान करता है , 
  2.   वात के सभी रोगो: चुकी  ग्रंथि वात नाशक बटी को वात नाशक बटी भी कहा जाता है और वात के सभी रोगो के इलाज के लिए उपयोग  किया जाता है जैसे  र्थराइटिस और वातिक जोड़ों के दर्द
  3. संधियों को मजबूत करना:  यह बटी संधियों को मजबूत करके उन्हें लचीला बनाती है और उनकी स्थिति को सुधार सकती है।

ग्रंथि वात नाशक बटी का उपयोग कैसे  करना चाहिए :

1.    किसी वेद या आयुर्वेद डॉक्टर की सलाह पर इस बटी को नियमित रूप से लें।

2. इसको भोजन और योग के साथ उपयोग में लाये ताकि इसके लाभ बढ़ जाएं।

3. निश्चित मात्रा में ही इस बटी का उपयोग सही रहेगा, और अधिक मात्रा में न लें।


                                             दूसरा तरीका:-

ग्रंथि वात नाशक बटी को बनाने का दूसरा तरीका सीखते है  
ग्रंथि वात नाशक बटी को तैयार करने का तरीका :- 

सोरा (कलमी ) -१ तोला(11 ग्राम ) 
कत्था  -१ तोला(11 ग्राम ) , 
शुद्ध सफ़ेद संखिया (२.५ मासे) (2 .३ ग्राम ) 

बाटी बनाने का तरीका :-  ऊपर दी गयी सभी जड़ीबूटियों को एक बर्तन में डाल ले फिर एक ओखली ले पथर की ओखली सबसे बढ़िया रति है फिर ओखली में रख कर जल के साथ रख कर इसको कूट ले और इसके छोटे छोटे टुकड़े करे जब मेथी के दाने के जितने टुकड़े हो जाये तो  इनको  सूखा ले


लाभ और उपचार :

  1. रकत को साफ़ करने में मदद करता है , 
  2. गाँठो के दर्द व् जोड़ो के दर्द को कम करता है  
  3. मूत्र में अम्लता में भी ये वाली ग्रंथि वात नाशक बटी असरदार है
  4.  पेट की गैस में भी बहुत उपयोगी है , 
  5. खासी, जुकाम के उपचार के लिए लाभदायक  है 

 

उपयोग में कैसे लेना है  :- 

नास्ते के ३० मिनट बाद  गाय के 12 ग्राम घी के साथ मिश्रित करके  गाय का 1/4 लिटिर (एक गिलास ) दूध के साथ  ले। 

 नोट- ध्यान रहे दूध उबाल ही पिए स्वाद के लिए चीनी मिला सकते है. यह गाय या भैंस का घी न होने पर इसको माखन, दूध, मलाई के साथ और बादाम के हलवे के साथ भी दिया जा सकता है 

लने से पहले ध्यान रखे  :- अगर रोगी को गर्मी हो जैसे जलन, प्यास और सर में चकर इत्यादि  हो तो इसका इस्तमाल न करे।

नोट  : "ग्रंथि वात नाशक बटीआयुर्वेदिक चिकित्सा या घरेलू उपचार में  एक प्रमुख उपाय है जो जोड़ों के दर्द को कम करने में हमारी मदद करता है। इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर से जरूर जानकारी हासिल कर ले और सभी ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन करें।



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