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पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा

 पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा

 पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
पीलिया:-

पीलिया, जिसे अंग्रेजी में "Jaundice" भी कहा जाता है, पीलिया में त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला हो जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है। बिलीरुबिन एक पीले रंग का पिग्मेंट है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है।

पीलिया के कारण:

  • लिवर की समस्याएं: हेपेटाइटिस, सिरोसिस, लिवर कैंसर आदि।
  • रक्त विकार: रक्त कोशिकाओं का अत्यधिक टूटना (हेमोलिसिस)।
  • बाइल डक्ट अवरोध: गॉलस्टोन, ट्यूमर, या पैंक्रिएटिक कैंसर की वजह से बाइल डक्ट में रुकावट।

पीलिया के लक्षण:

  • त्वचा और आंखों का पीला होना:- यह पीलिया का सबसे स्पष्ट लक्षण है।
  • गहरे रंग का पेशाब:- बिलीरुबिन की अधिक मात्रा के कारण।
  • फीके रंग का मल:- बाइल की कमी के कारण।
  • त्वचा में खुजली:- शरीर में बाइल साल्ट्स की वृद्धि के कारण।
  • थकान और कमजोरी:- लिवर की खराबी के कारण।
  • भूख कम लगना:- लिवर की समस्याओं के कारण।
  • बुखार:- यदि पीलिया संक्रमण के कारण हो।
  • पेट में दर्द:- विशेषकर ऊपरी दाएँ हिस्से में, जो लिवर के क्षेत्र में होता है।

पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा:-

औसधि:-

  • सफेद पुनर्नवा की जड़,(जिसको आम भाषा में गध-बड़ कहा जाता है )
  • सोंठ
  • नीम की हरी छाल
  • ताज़ी गडूची
  • हल्दी
  • कुटकी
  • देवदारु
  • हरड़

ये आठों चीज़ो को तीन तीन माशे  ले 

विधि -

  • सभी को एक एक करके कूट ले या छोटे छोटे टुकड़े कर ले 
  • फिर एक मिट्टी या कलईदार बर्तन में ५००ग्राम पानी ले 
  • उन सब औसधि को लिए गए पानी वाले बर्तन में भिगो ले जिससे वो नरम और गल जाएगी 
  • सुबह लिए गए मिट्टी का या कलाई दार बर्तन में जिसमे औसधि को भीगोया है उसका काढ़ा पका ले 
  • जब पकने के बाद लगभग 125 ग्राम रह जाये तो उसको आग से उतार ले 
  • अब कपडे से छान कर उसको ठंडा होने के लिए रखे 
  • फिर उसमे लगभग ६ माशे ( ६ ग्राम ) मधु / सहद मिला ले 
  • इसकी लेने की यह एक मात्रा है 

गुण:-

  • यह काढ़ा पीलिये के इलाज में बहुत उपयोगी है 
  • सूजन में भी इस काढ़े को लिया जा सकता है जो आपकी सूजन को कम कर सकता है 
  • जिगर और तिल्ली को बढ़ने के कारण जो विकार उत्पन होगा जैसे की जलन, सूजन, बुखार तथा पसलियों के दर्द में आरामदायक है 
  • कब्ज तो तोड़ने में भी इस काढ़े का उपयोग किया जा सकता है 
  • यह घरेलु नुस्खा उदर की वृद्धि में हेल्पफुल है
  • इसको शरीर में अग्नि की मंदता दूर होती है पाचन सकती को बढ़ाता है 
  • कुछ सप्ताह इसको लेने से शरीर की निर्बलता दूर होती है और शरीर के बल में वृद्धि होती है 

मात्रा /समय:-

मात्रा:-इसको पांच तोले से दस तोले (५० ग्राम से १०० ग्राम )तक ही लेना सही होता है 

समय:-सुबह इस काढ़े को ताजा बना कर पीना चाहिए 

नोट:- 

  • ध्यान देने वाली बात की प्रसूता महिला(जिस महिला का बच्चा तीन महीने से छोटा है ) के शरीर में सूजन है तो इसका सेवन करने से लाभ उठाया जा सकता है 
  • अगर किसी को पतली टट्टी (लूज़ मोशन) हो रही हो तो उस समय इस काढ़े का उपयोग रोक दे 
  • इस काढ़े को लेने से पहले व तैयार करने से पहले किस डॉक्टर या वैद्य से परमर्श जरूर कर ले 
  • अगर आप पीलिये का आयुर्वेदिक उपचार काढ़े का उपयोग करके लाभ ले चुके है तो ओर से भी इस घरेलु नुस्खे को साझा करे 



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. जले स्थान के लिए पारंपरिक मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज 
  14. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  15. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  18. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  19. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

 

पेट की गैस का घरेलु उपचार -रोचक चूरन

पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण 


रोचक चूरन:- 
पेट की गैस का घरेलु उपचार -रोचक चूरन 

 स्वादिष्ट चूर्ण जिसको रोचक चूरन भी कहा जाता है और बच्चे जवान और बुड्ढे भी इसको बहुत पसंद करते है यह करियाने की दुकान पर आसानी से अलग अलग नाम से मिल जाता है जो चटपटा होता है खाने में भी स्वादिष्ट है यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है जो पाचन क्रिया के साथ भूख को बढ़ाता है यह पेट की गैस का घरेलु उपचार रोचक चूरन है, यह पेट को ठीक करने का एक आयुर्वेदिक उपचार भी है  इस ब्लॉग पोस्ट के माद्यम से हम आज इस चूर्ण के ऊपर चर्चा करेंगे जिसमे समझगे की इसको कैसे तैयार करना है इसकी विधि यह घरेलु उपचार में कैसे उपयोगी है व् किसी मात्रा में लेना सही होगा 

  

रोचक चूर्ण औषदि :-

  • सौंफ -दो तोले
  • छोटी पीपली - दो  तोले ,
  • काली मिर्च -तीन तोले 
  • टाटरी(इमली का सत्व )- तीन तोले 
  • सफ़ेद जीरा -चार तोले 
  • सेंधा नामक -तेरहा तोले 
  • चीनी -तेरहा तोले 


कैसे तैयार करे :-

  • नमक, चीनी, टाटरी इन तीन चीज़ो की अलग अलग करके पीसे ले और कपडे से छान कर रख ले
  • फिर सौंफ, काली मिर्च, पीपली और जीरे को एक साथ कूट ले और उसको भी कपडे से छान ले 
  • उसके बाद उन सभी को एक साथ अच्छे से मिला ले 
  • और एक साफ़ सुथरी काच की शीशी में रख ले 

गुण:- 

  • स्वादिष्ट चूर्ण  - यह चूर्ण विशेष कर रूचि-उत्पादक है स्वादिष्ट होने के कारण बार-बार खाने को मन करता है 
  • पाचक - यह चूर्ण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पाचन में हेल्प करता है 
  • भूख - यह चूर्ण मन को प्रसन्नकर व् मुख की विरसता को ठीक करके भूख को बढ़ाता है 
  • पेट गैस - अगर भोजन के बाद इसकी एक निश्चित मात्रा ली जाये तो यह पेट में गैस को इकठा होने की शिकायत को दूर करता है     


मात्रा व् समय:- 

  • मात्रा - इस चूर्ण को एक से तीन माशे (1 से 3 ग्राम )तक लेना सही रहता है  
  • समय - भोजन के बाद दोनों वक्त सुबह शाम लेना सही रहेगा या कष्ट के समय इसका उपयोग करना चाहिए  



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. जले स्थान के लिए पारंपरिक मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज
  14. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  15. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  16.  पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज

सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज

सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज 
सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार रामबाण इलाज 

सिर दर्द एक आम समस्या है जो लगभग लोगो को हो ही जाती है चाहे तो वो काम की अधिकता के कारण, तनाव के कारण. अच्छी नींद न आने के कारण, खासी में, बुखार में, थकान में सिर दर्द हो जाता है कभी कभी दर्द इतना बड़ जाता है की सहन नहीं होता और कुछ लोगो में लगातार सिर दर्द होने से माइग्रेन की समस्या जन्म ले लेती है फिर न हमारे काम में हमारा इतना ध्यान जाता है और न ही मन को संतुष्टि मिलती है वैसे तो सिर दर्द के बहुत से घरेलू उपचार व् आयुर्वेदिक उपचार है जो आपको इंटरनेट के माद्यम से मिल जायेगे पर हम इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अलग अलग प्रकार के प्रचीन आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बात करेंगे जो एक प्रभावी, उपयोगी एक रामबाण इलाज है जिसका उपयोग बहुत पहले से होता आ रहा है और अब भी यह बहुत उपयोगी है

 तेजपात का डण्ठल से सिर दर्द का इलाज:-


औषधि :- 

  • तेजपात का डण्ठल ५ ग्राम ले 

क्या करना है :- 

  • तेजपात डण्ठलों को ले उसको पानी के साथ किसी सील या पत्थर पर बिलकुल महीन (बारीक) पीस कर रख ले  यह एक मात्रा है

उपचार  :-

  •  इसे सिर दर्द मीट जाता है 

उपयोग  :- 

  • सिर में जिस जगह दर्द हो रहा है वहाँ इसका मोटा लेप करना होता है लगभग आधे घंटे के बाद जब लेप सुख जाये तब उसको हटा ले 

नोट :-

दिहातों में यह उपचार सिर दर्द के समय व्यवाहर में लाया जाती है यह अब भी उतना ही सफल उपचार है  


 मुचकुन्द के फूल से सिर दर्द का इलाज:-

 औषधि:- 

  • मुचकुन्द के फूल १ तोला लगभग ११ ग्राम (अगर आप मुचकुन्द का पेड़ के बारे में नहीं जानते तो  इस ब्लॉग पोस्ट में नीचे व्यख्या दी गयी है  वहाँ से पढ़ कर आपको मुचकुन्द के पेड़ को पहचानने में आसानी होगी)

विधि :-

  •  मुचकुन्द के फूल को पानी के साथ बारीक़ पीस ले 

उपचार :- 

  • यह सिर दर्द का उपचार करता है 

उपयोग  :- 

  • सिर में जहा दर्द हो उस दर्द वाली जगह पर इसका मोटा लेप करना है
  •  लगभग आधे घंटे बाद सिर पर किया लेप जब थोड़ा गीला हो उसको दर्द वाले स्थान से हटा ले 
  • फिर से यही परिक्रिया सुरु करे यह एक दिन में दो से तीन बार करनी है 
  • फिर आपको अच्छा और सिर में ठंडक महसूस होगी 

नोट :-

 यह आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदीय शार्गंधर, भावप्रकाश आदि मान्य ग्रंथो में से लिया गया है 

मुचकुन्द का पेड़

मुचकुन्द का पेड़ साखू की तरह बहुत बड़ा होता है इसके पत्ते भी साखू की तरह ही होते है बसंत से गर्मी की ऋतू तक इस पेड़ में फूल आते है और पेड़ो के नीचे परिपक़्व फूल गिरे मिलते है वर्षा ऋतू में इसके फूल ख़त्म हो जाते है इसके फूलो दो से तीन इंच लम्बे ,पीले खुरदरे ,रोमयुक्त और चम्पा के फूलो के जेसे तीन और से फाँकदार होते है फूलो से मीठी और मनमोहन गंध निकलती है यह महक फूलो के सूखने से भी ज्यों की त्यों बनी रहती है निघन्टुओं में इसे चरपरा ,कड़वा ,गर्म ,स्वर को उत्तम बनाने वाला कफनाशक, खासी, त्वचा के विकार, शोथ, सिर का दर्द, त्रिदोष, रक्तपित, पित और रक्तदोषनाशक लिखा है पर सिर पीड़ा में यह बहुत उपयोगी माना गया है 



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  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
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  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
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  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
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  14. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  15. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज

जले स्थान के लिए आयुर्वेदिक मलहम-एक रामबाण घरेलु उपचार

जले स्थान के लिए मलहम-रामबाण उपचार

जले स्थान के लिए मलहम:-

पारंपरिक उपचारों की दुनिया में, अनेकों खजाने हैं जो पीढ़ियों से हमें प्राप्त हुए हैं। भारत एक ऐसा देश है जहा हमेसा घरेलु नुस्खों जा उपयोग होता रहा है और आज की दुनिया भी आयुर्वेदिक उपचारो पर भरोसा करती आई है ऐसा ही एक खजाना है, जले स्थान के लिए मलहम का, जो एक घरेलु उपचार है जो सरल परंतु प्रभावी सामग्री का प्रयोग करके शांति और चिकित्सा प्रदान करता है। आज, हम एक पुरानी प्रसिद्धि की रेसिपी में गहराई से झाँकते हैं, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है जिसका सारा सामान आपके घर में ही मौजूद है ।


सामग्री:-

जले स्थान के लिए मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार


  • सेमल की रुई - 2.5 तोले (35 gram)
  • ारेड़ी का तेल (रेड़ी का तेल) - 2.5 तोले (35 gram)

विधि:-


कांसे की थाली में रेड़ी का तेल डालें।

सेमल की रुई को इसमें फ़ैला कर, हथेलियों से मलें।

मलहम का स्वरुप प्राप्त होने पर, मिश्रण को किसी साफ़ सुथरी शीशी में संग्रहित करें।

मलहम के फ़ायदे:-


मलहम का प्रयोग, जलने पर हुए स्थान पर, सुकून पहुंचाने में महत्वपूर्ण होता है।



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  14. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  15. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार

 मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार

मंडूर का सिद्ध योग

 मंडूर बीस तोले (२३० ग्राम ) गन्ने का पुराना सिरका डेढ़ सेर(१४००ग्राम) आवला, बड़ी हर्र  और बहेड़ा दो दो तोले(२३ ग्राम)  मजीरा दो तोले(२३ग्राम) और गाय के दूध का दही एक सेर(९३० ग्राम) ले

 विधि

 एक लोहे की छोटी कड़ाही में तेज आंच पर मंडूर को तपाये जब वह लाल हो जाये तब उसे आधा सेर(४६५ग्राम) सिरके में बुझा दे पून: उसे सिरके से निकाल कर तप्त (गर्म )  करे इधर  मंडूर को बुझाये सिरके को अलग कर उतना ही दूसरा सिरका बुझाने वाले पात्र में रखे और लाल होने पर मंडूर उसमे डाल दें इसी क्रम में अलग-अलग सिरके में तीन बार बुझा चुकाने पर मंडूर की इमामदस्ते में कूटे और जल से चार पांच बार धो ले जब साफ़ जल निकलने लगे तब उसे सूखा कर कूटें और मोटे कपडे से छानकर एक लोहे की कड़ाही में रख ले फिर उसमे त्रिफला (आवला, हर्र और बहेड़ा) और मजीठ का कपड़छान किया चूरन का मिश्रण कर एक सेर(९२० ग्राम) दही डाल लोहे की मुसल से आठ घंटे तक घोटें जब मंडूर लेप की तरह बन जाये तब उसे सीसी या मीट्टी के ढक्कनदार  पात्र में रख ले


 गुण
बीमारी के बाद की कमजोरी में रामबाण घरेलु उपचार


 इसके सेवन से सग्रहणी, खून की कमी, प्रदर(Lucoreia), ऋतू की रूकावट, तीसरे प्रहर से कुछ कुछ हरारत  का होना, बीमारी के बाद की कमजोरी , तिल्ली और जिगर की खराबी तथा बच्चों के सूखे आदि का रोग दूर होता है 

 मात्रा

 तीन माशे(तीन ग्राम)  बारह से चार साल के लड़के को डेढ़ माशे(३/2 ग्राम) और उसे नीचे की उम्र के बच्चो को चार से दो रतीं (182 मिलीग्राम )तक


 अनुपान             

  • गाँये के दूध से तैयार अधबिलोया हुआ दही पांच से दस तोले (55  से 116 ग्राम )तक यह संग्रहणी, तिल्ली और जिगर का अनुपान है 
  •  प्रदर में चावल के धोवन और शहद से,
  •  ऋतु की रुकावट में काले तिल के पानी (दो तोले(23  ग्राम) काले तिल की आधा पाव जल में रात्रि में भगो दे सुबह मसलकर कपडे से छान जल ले ले ) 
  • हरारत के समय गर्म जल से 
  • रक्त-प्रदर में आड़हुल के फूलो के शरबत या शरबत नीलोफर के साथ दे।

 नोट

  •  तिल्ली और जिगर की खराबी में कुलथी की दाल का रस, परवल खेखसी, गुमे की पत्तियों का साग, बथुआ, सुरन और बालमखीरे का अर्क इत्यादी क्षार प्रधान द्रव्य को पथ्यरूप में लेना चाहिए और चीनी के स्थान पर शहद का प्रयोग करना चाहिए
  •  प्रदर में गूलर, कच्चे केले इत्यादी की तरकारी या भरता लेना लाभकारी होता है 
  • ऋतू की खराबी या रुकावट में राई की चटनी का भोजन के समय प्रयोग और गर्म पानी में  कपडे से पेडू पर सेक करना लाभकारी होता है 
  •   संग्रहणी में बकरी का दूध, मसूर की दाल का रस, पुराने लाल चावल का मड़गीला भात, मठ्ठा, आजवाइन, कालानमक, कच्चे बिल को आग में पका और उसमे थोड़ा एक साल पुराण गुड़ और एक मासा(एक ग्राम) के बराबर साथ का चूर्ण मिलाकर खाना तथा कच्चे केले की तरकारी इत्यादी लघु, पाचक, क्षरीय एवं ग्राही पथ्य उपयोगी है 
  •  खून की कमी में दूध, मुनक्का, मुंग, परवल, पुराने जोों और गेहू तथा शहद इत्यादी शरीर पोषक द्रव्य पथ्य है   ।॥।



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  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
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खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार

 खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार 

खांसी एक सामान्य समस्या है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह समस्या सर्दी, जुकाम, एलर्जी या अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं के कारण हो सकती है। जबकि बाजार से आप खांसी के लिए कई प्रकार की दवाएं खरीद कर ले सकते हो, पर हम यहाँ घरेलु नुस्खे से बना खांसी पर काढ़ा जो एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार है जिसको, खांसी से राहत पाने के लिए अपने घर में कभी भी बना सकते हैं। काढ़ा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करके बनाया जाता है, जो खांसी को कम करने में मदद करते हैं और श्वसन तंत्र को आराम पहुंचाते हैं।

इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम, हम जानेंगे कि खांसी पर काढ़ा एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार को कैसे तैयार किया जाता है, इसके विभिन्न प्रकार और इसके फायदे

काढ़ा क्या है?
खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार

काढ़ा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक पेय है जिसे विभिन्न जड़ी-बूटियों और मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में किया जाता है, खासकर श्वसन तंत्र से संबंधित समस्याओं के लिएकाढ़ा न केवल खांसी और गले की खराश को शांत करता है बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है।

खांसी पर काढ़ा बनाने की विधि:-

आवश्यक सामग्री:

1. तुलसी के पत्ते (Basil leaves): 10-12 पत्ते

2. अदरक (Ginger): 1 इंच का टुकड़ा, कद्दूकस किया हुआ

3. काली मिर्च (Black pepper): 5-6 दाने

4. लौंग (Cloves): 2-3

5. दालचीनी (Cinnamon): 1 इंच का टुकड़ा

6. शहद (Honey): 1 चम्मच (स्वादानुसार)

7. पानी: 2 कप

बनाने की विधि:

1. पानी उबालें: एक पैन में 2 कप पानी डालें और इसे उबलने के लिए रखें।

2. जड़ी-बूटियाँ डालें: जब पानी उबलने लगे, तो उसमें तुलसी के पत्ते, अदरक, काली मिर्च, लौंग, और दालचीनी डालें।

3. उबालें: इस मिश्रण को धीमी आंच पर 10-15 मिनट तक उबालें, जब तक कि पानी आधा न हो जाए।

4. छानें: मिश्रण को छानकर एक कप में निकाल लें।

5. शहद मिलाएं: इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और अच्छी तरह से हिलाएं

आपका इस तरीके से खांसी के लिए काढ़ा तैयार हो जायेगा। इसको  धीरे-धीरे चुस्की लेकर पीना है । दिन में लगभग दो से तीन बार तक इसका सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।

काढ़े के विभिन्न प्रकार:-

खांसी के उपचार के लिए कई प्रकार के काढ़े बनाए जा सकते हैं, जिनमें से कुछ लोकप्रिय प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. तुलसी-अदरक काढ़ा:

सामग्री: तुलसी के पत्ते, अदरक, शहद, काली मिर्च

लाभ: तुलसी और अदरक में एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो खांसी और गले की सूजन को कम करते हैं।

2. हल्दी-दूध काढ़ा:

सामग्री: हल्दी, दूध, शहद

लाभ: हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो एक शक्तिशाली एंटीइंफ्लेमेटरी एजेंट है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।

3. मुलैठी काढ़ा:

सामग्री: मुलैठी की जड़, अदरक, शहद

लाभ: मुलैठी गले की खराश और खांसी को शांत करने में मदद करती है और श्वसन तंत्र को आराम पहुंचाती है।

काढ़े के फायदे:-
खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार

1. खांसी में राहत: काढ़ा गले की खराश और खांसी को शांत करता है। इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण संक्रमण को कम करते हैं।

2. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है: काढ़ा में उपयोग किए जाने वाले जड़ी-बूटियाँ और मसाले प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

3. श्वसन तंत्र को साफ करता है: काढ़ा बलगम को ढीला करता है जिससे बलगम को बाहर निकालने में मदद मिलती है और श्वसन तंत्र को साफ करता है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

4. आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार : काढ़ा एक आयुर्वेदिक उपाय है और इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते। यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सुरक्षित है।

खांसी से बचने के लिए अन्य उपाय

काढ़ा के साथ-साथ, खांसी से बचने के लिए कुछ और भी उपाय अपनाए जा सकते हैं:

1. हाइड्रेशन: पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं। इससे गले की सूखापन कम होती है और खांसी में राहत मिलती है।

2. नमी बनाए रखें: घर के अंदर नमी बनाए रखें, खासकर सर्दियों में। ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें या पानी के कटोरे को कमरे में रखें।

3. धूल और एलर्जेंस से बचें: धूल और एलर्जेंस से बचने के लिए नियमित रूप से सफाई करें और एलर्जी के कारणों से दूर रहें।

4. धूम्रपान से बचें: धूम्रपान से गले और फेफड़ों में जलन होती है, जिसके कारण खासी बनती है अगर खासी पहले से हो तो यह उसको बढ़ा सकती है।

5. गर्म तरल पदार्थ पिएं: गर्म सूप, हर्बल चाय और गर्म पानी पिएं। यह गले को शांत करता है और खांसी में राहत मिलती है।

निष्कर्ष

खांसी एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। इसके उपचार के लिए काढ़ा एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार है। विभिन्न जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करके बनाए गए काढ़े न केवल खांसी में राहत देते हैं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करते हैं। खांसी के लिए काढ़ा बनाना आसान है और यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सुरक्षित है। नियमित रूप से काढ़ा का सेवन करने से आप खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं से बच सकते हैं।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और घरेलु नुस्खों के उपायों को अपनाना हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। खांसी के लिए काढ़ा एक ऐसा ही घरेलु नुस्खा है, जो आपको और आपके परिवार को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकता है। इस ब्लॉग पोस्ट में दिए गए काढ़े की विधि और उसके फायदे आजमाकर देखें और खांसी से राहत पा सकते है । अगर आपकी खांसी पुरानी या रुक नहीं रही है तो एक डॉक्टर को जरूर दिखाए और उपचार उनकी देख रेख में ही करे।  

यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें और अपने अनुभव हमारे साथ कमेंट में जरूर बताएं। स्वस्थ रहें, खुश रहें!



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
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  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
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  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
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  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
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  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज
  14. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  15. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  18. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  19. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  20. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज

बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार

 बुखार के लिए घरेलु नुस्खा  : एक अद्वितीय घरेलू उपचार

मलेरिया बुखार

 बुखार होने के बहुत से कारण  हो सकते है पर हम सबसे पहले  cold fever  की बात कर रहे जो एक गंभीर बीमारी है जिसको आयुर्वेदिक भाषा में शीत ज्वर, अंग्रेजी में मलेरिया (Malaria) कहा जाता है, एक गंभीर और आम बीमारी है जो की मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलती है। यह बीमारी मुख्यतः उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होने का ज्यादा खतरा रहता है और इस बुखार के मुख्य कारण बुखार, ठंड, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। शीत ज्वर (मलेरिया) का सही और समय पर उपचार न किया जाये तो यह जानलेवा बन सकता है। इसके उपचार के लिए घरेलू नुस्खे एक सुरक्षित और आयुर्वेदिक विकल्प हो सकता है। इस ब्लॉग में, हम बुखार के लिए घरेलु नुस्खे का एक अद्वितीय घरेलू उपचार के बारे में विस्तार से जानेंगे।


मलेरिया बुखार के लक्षण

cold fever / मलेरिया बुखार आमतौर पर मच्छर के काटने के 10-15 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं। इनमें शामिल हैं:

1. बुखार और ठंड लगना: अचानक बुखार के साथ ठंड लगती है  और पसीना भी  आता है ।

2. सिरदर्द: गंभीर सिरदर्द और थकान रहती है ।

3. मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होने लगता है और ऐंठन की समस्या पैदा हो जाती है  ।

4. थकान और कमजोरी: अत्यधिक थकान रहती है और कमजोरी महसूस होने लगती है ।

5. उल्टी और मिचली: उल्टी और मिचली की समस्या होने लगती है ।

बुखार के लिए घरेलु नुस्खे के फायदे

बुखार के लिए घरेलु नुस्खे  एक विशेष हर्बल उपचार है जो प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है। इसके निम्नलिखित फायदे हैं:

1. प्राकृतिक और सुरक्षित: इसमें केवल प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ और प्राकृतिक सामग्री होती हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स का खतरा बहुत कम होता है।

2. तेजी से राहत: बुखार के लक्षणों से तेजी से राहत दिलाता है।

3. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना: यह घरेलु नुस्ख़ा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

4. लिवर की सुरक्षा: यह लिवर को सुरक्षित रखता है और उसे मजबूती प्रदान करता है।

5. शरीर की सफाई: यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है और रक्त को शुद्ध करता है।

यह एक आयुर्वेदिक औषधि की तैयारी का सूची दिया गया है जो बुखार के लिए घरेलु नुस्खे की तैयारी में मदद कर सकती है। निम्नलिखित विधि का पालन करके इसे बनाया जा सकता है:

सामग्री:


1. गिलोय (Tinospora cordifolia): 50 ग्राम
2. नीम की पत्तियाँ (Azadirachta indica): 25 ग्राम
3. काली मिर्च (Piper nigrum): 10 ग्राम
4. तुलसी के पत्ते (Ocimum sanctum): 25 ग्राम
5. अदरक (Zingiber officinale): 10 ग्राम
6. शहद: स्वादानुसार

तैयारी की विधि:

1. सभी सामग्रियों को धो लें और उन्हें अच्छे से सुखा लें
2. सभी सामग्रियों को एक साथ पीस लें या चूर्ण बना लें
3. चूर्ण को अच्छे से मिला लें ताकि एक होमोजीनस मिश्रण बने।
4. तैयार मिश्रण को साफ और सूखे जार में स्थानित करें।
5. प्रति दिन, 1 चमच तैयार मिश्रण को गर्म पानी के साथ लें।

दूसरी विधि
                आपको एक बुखार की दूसरी विधि के बारे में जानकारी देते है 

बुखार के लिए घरेलू उपचार:-

आप बुखार के घरेलु नुस्खे  में  विजय ( भांग ) और काली मिरच का प्रयोग भी कर सकते यह भी बुखार को कम करने पूरी तरह सक्षम है । 

औसधि क्या और कितनी  ले :-

  1. विजय ( भांग ) - २ रत्ती 
  2. काली मिरच -११ दाने


क्या करना है :- 

आपको विजय ( भांग )  को लगभग २ रत्ती तक लेना है और काली मिरच के लगभग ११ दाने लेने है इन दोनों की पानी में मिला कर के एक साथ पीस ले फिर इस मिश्रण की गोली बना ले।  

कैसे ले :-

यह बुखार का घरेलु उपचार बहुत ही आसान है इसको लेना भी बहुत आसान है बुखार आने से दो -तीन घंटे पहले गर्म पानी के साथ इस गोली को खानी चाहिए। 
 Note:- बच्चो को उनकी उम्र के हिसाब के कम करके देनी चाहिए ।

इन दोनों बुखार के घरेलु उपचारो का प्रयोग बहुत ही लाभकारी है इसे नियमित रूप से सेवन करने से cold fever / मलेरिया / बुखार में लाभ हो सकता है। फिर भी, इसे इलाज के रूप में उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा।


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  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज
  14. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  15. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  18. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार

 जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार

जीरा चूर्ण:-

जीरा जिसे अंग्रेजी में Cumin  कहा जाता है हमारी भारतीय रसोई में जीरा हमेसा ही खाना बनाने में इस्तमाल मसाले के रूप में लिया जाता रहा है जिसका उपयोग हम केवल भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए करते है। जीरे में बहुत से औषधीय गुण होते है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। जीरा चूर्ण एक सरल और प्रभावी आयुर्वेदिक व् घरेलू उपचार है जो शरीर को अंदर से लेकर बाहर तक बहुत से रोगो को दूर करने में साहयक  है । इस ब्लॉग पोस्ट में हम जीरा चूर्ण के फायदों तैयारी की विधि उपयोग के तरीके और सुरक्षा संबंधित जानकारी के बारे में विस्तार से जानेंगे।


जीरा चूर्ण के फायदे

जीरा चूर्ण के कई स्वास्थ्य लाभ हैं जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं:

जीरा चूर्ण  का उपयोग

जीरा चूर्ण का उपयोग 1 ग्राम बकरी के एक गिलास दूध के साथ सुबह और शाम समान मात्र में लेने से उपचार स्त्रियो के ऋतू का अवरोध , हल्का बुखार , पतली टट्टी , मदाग्नि वन्ध्यापन , बच्चे का न होना,  शाररिक दुर्बलता , गर्भस्य को सुद्ध करने वाला, बुखार में, वीर्यवर्धक रुचिकारक, कफनाशक, आखो के लिए भी हितकारी है। 

औषद्धि:-

सफ़ेद जीरा लगभग 100 ग्राम

 जीरा चूर्ण की तैयारी की विधि:-  

जीरा चूर्ण को घरेलु नुस्खा बनाना बहुत ही सरल और आसान है। यहाँ एक विधि दी गई है

सबसे पहले जीरे को अच्छी तरह से साफ कर लें ताकि उसमें कोई भी किसी प्रकार की गंदगी या अशुद्धि न हो। उसको अब एक तवे या पैन के जरिये जीरे को धीमी आँच पर हल्का भूनें इसे तवे या पैन पर लगातार चलाते या घूमते रहें ताकि जीरा जलने न पाए नहीं तो आप जीरे को तेज धुप में भी सूखा सकते है पर भुनाना अच्छा रहता है। भूनने या धुप लगाने के बाद जीरे को ठंडा होने दें, ठंडे जीरे को मिक्सर या ग्राइंडर में डालकर बारीक चूर्ण बना लें। तैयार जीरा चूर्ण को एक साफ और सूखे कांच के जार में स्टोर करें। यह चूर्ण लंबे समय तक ताजगी बनाए रखता है। 

 जीरा चूर्ण का उपयोग :-


जीरा चूर्ण का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है। यहाँ इसके कुछ सामान्य और प्रभावी उपयोग बताए गए हैं:
1. पाचन सुधारने के लिए:
  • 1 चम्मच जीरा चूर्ण को एक गिलास पानी में मिलाकर भोजन के बाद पीएं।पाचन में सुधार और जीरा चूर्ण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच, और पेट दर्द से राहत मिलती है।
2. वजन घटाने के लिए:
  • एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच जीरा चूर्ण और आधा नींबू का रस मिलाकर सुबह खाली  पेट पीएं। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, मोटापे में कमी और वजन घटाने में मदद करता है।
3. त्वचा की समस्याओं के लिए:
  • 1 चम्मच जीरा चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे चेहरे पर लगाएं। 15-20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। इससे मुंहासे और त्वचा की सूजन कम होती है।
4. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए:
  • एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच जीरा चूर्ण और एक चुटकी हल्दी मिलाकर पीएं। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
5. एनीमिया के लिए:
  • 1 चम्मच जीरा चूर्ण को गुड़ के साथ मिलाकर खाएं। इससे शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है और एनीमिया से राहत मिलती है।

सावधानियाँ:-

सावधानियाँ हालांकि जीरा चूर्ण पूर्ण तरिके से सुरक्षित है परन्तु कुछ सावधानियाँ आवश्यक हैं:
  1. .मात्रा:-  जीरा चूर्ण का एक समान्य मात्रा में लेना आवश्यक है कयूकि जीरा चूर्ण  गर्म होने के कारण पेट में जलन और अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
  2. गर्भावस्था और स्तनपान:- गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाएं जीरा चूर्ण का सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।
  3. एलर्जी:- यदि आपको जीरे से एलर्जी है तो इसका उपयोग करें।
  4. डॉक्टर की सलाह: -यह घरेलु नुस्खा, डॉक्टर की व् वेद की निगरानी में लेना चाहिए यदि कोई स्वास्थ्य समस्या बनी रहती है या बढ़ती है तो डॉक्टर से संपर्क करें।

 निष्कर्ष :-

जीरा चूर्ण एक बहुत लाभकरी और घरेलू नुस्खा है जो जिसे लगभग बहुत स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इस घरेलू उपचार से हमारे पाचन तंत्र को मजबूती मिलती हैं और यह वजन घटाने में मदद करता हैं जीरा चूर्ण को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना एक सरल और घरेलु तरीका है जिससे आप और आपका परिवार स्वस्थ रह सकता हैं।इस चूर्ण के घरेलू उपचार को बनाना बहुत ही सरल है । जीरा चूर्ण की तैयारी और उपयोग के बारे में पूर्ण तरिके से बतया गया है उसका पालन करके आप अपने जीवन को रोगो से दूर रख सकते है और जीरा के अद्वितीय लाभों का आनंद ले सकते हैं। घरेलु उपचारों की पारंपरिक ज्ञान को अपनाकर और उसे आधुनिक जीवन में शामिल करके हम स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते है।


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दस्त का घरेलू इलाज- घरेलु उपचार

 दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा

दस्त, जिसे डायरिया के नाम से भी जाना जाता है, लोगो का काम में व्यस्त होने के कारण व् घर में समय पर संतुलित आहार न लेने के कारण यह एक आम समस्या बन गयी है इसके होने के बहुत से कारण हो सकते है , जैसे संक्रमण, खाद्य विषाक्तता (जैसे की फ़ास्ट फ़ूड, अधिक तला हुआ भोजन, भोजन में गरम मसलो की अधिकता, बासी भोजन ) , पेट के रोग, या पाचन तंत्र की असामान्यताएं।

 दस्त की समस्या बहुत असुविधाजनक हो सकती है और पतले दस्त होने के कारण शरीर में पानी की कमी बन सकती है  जिसके शरीर में एनर्जी की कमी और पुरे दिन शरीर आलसी बना रहता है। घरेलू  इलाज व् घरेलू उपचार में,हम इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा जानेगे और जिसको दस्त रोकने की आयुर्वेदिक दवा, दस्त नाशक बटी भी कहा जाता है  जो बहुत ही एक प्रभावी और सुरक्षित तरीका है जो न केवल पानी जैसे दस्त रोकने के उपाय बल्कि पाचन तंत्र को संतुलित करने में मदद करेगा । इस ब्लॉग पोस्ट में, हम दस्त रोकने का घरेलू इलाज जैसे की दस्त नाशक बटी के फायदों, तैयारी की विधि, उपयोग के तरीके, और सुरक्षा संबंधित जानकारी के बारे में विस्तार से जानेंगे।


दस्त रोकने की आयुर्वेदिक दवा के फायदे:-

दस्त नाशक बटी एक पारंपरिक पानी जैसे दस्त रोकने के रोकने की एक आयुर्वेदिक दवा है जो कई प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों से बनाई जाती है। इसके निम्नलिखित फायदे हैं:

  1. आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार  : इसमें प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ और घरेलू सामग्री होती हैं, जिसके कारण कोई साइड इफेक्ट्स का डर नहीं रहता  हैं।
  2. पाचन में सुधार : यह पाचन तंत्र को संतुलित करता है और भोजन की पचने में मदद करता है जिसे पाचन क्रिया में सुधार आता है ।
  3. जल्दी राहत: दस्त के लक्षणों से तुरंत राहत प्रदान करता है, जैसे पेट दर्द, ऐंठन और पेट में मरोड़ आना और दस्त लगना,मल का बार-बार आने से रोकता है ।
  4. पानी की कमी से बचाव: शरीर में जल की मात्रा को संतुलित रखता है और निर्जलीकरण को रोकता है।
  5. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना: इसमें मौजूद औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

दस्त रोकने का घरेलू उपचार की विधि

दस्त नाशक बटी को आसानी से हम अपने घर पर भी तैयार कर सकते  है, आपको कुछ जड़ी-बूटियों और घरेलू सामग्रियों की आवश्यकता होगी जो आप की रसोई व् कुछ आपके नजदीकी पंसारी की दूकान से मिल जाएगी  । यहाँ एक सरल और आसान विधि का वर्णन किया गया  है:

आवश्यक सामग्री:

  1. बेल फल (Aegle marmelos): 50 ग्राम
  2. सौंफ (Foeniculum vulgare): 25 ग्राम
  3. धनिया पाउडर (Coriandrum sativum): 25 ग्राम
  4. जीरा (Cuminum cyminum): 25 ग्राम
  5. अजवाइन (Trachyspermum ammi): 25 ग्राम
  6. मुलेठी (Glycyrrhiza glabra): 25 ग्राम
  7. हींग (Asafoetida): 5 ग्राम
  8. काला नमक (Black salt): स्वादानुसार
  9. शहद: आवश्यकतानुसार

तैयारी की विधि:

  1. सबसे पहले, सभी जड़ी-बूटियों और घरेलू सामग्रियों को अच्छी तरह से साफ करें और धूप में सुखा लें।
  2. सुखाने के बाद, सभी जड़ी-बूटियों को एक-एक करके मिक्सी व् ग्रंडर से बारीक पीस लें और पाउडर बना लें।
  3. इन पाउडरों को एक साथ मिलाएं और एक बड़े साफ़ बर्तन में रख लें।
  4. इस मिश्रण में स्वादानुसार काला नमक और थोड़ी हींग पाउडर मिलाएं।
  5. अब इस मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा करके शहद के साथ मिलाएं और छोटी-छोटी गोलियाँ (बटी) बना लें।
  6. इन गोलियों को एक साफ और सूखे कांच के जार में स्टोर करें।

दस्त का घरेलू इलाज का उपयोग:

दस्त नाशक बटी का उपयोग बहुत सरल और आसान  है, लेकिन इसे सही तरीके से और सही मात्रा में लेना आवश्यक है। यहाँ इसका उपयोग कैसे करें, बताया गया है:

  1. खुराक: दस्त नाशक बटी की एक गोली (लगभग 500 मिलीग्राम) दिन में 2-3 बार लें। बच्चों के दस्त की दवा के लिए खुराक को आधा कर दें।
  2. जल के साथ सेवन: बटी को पानी के साथ निगलें। यह महत्वपूर्ण है कि इसे खाली पेट न लें।
  3. भोजन के बाद: इसे भोजन के बाद लेना सबसे अच्छा माना जाता है, ताकि यह पाचन में मदद कर सके और दस्त को रोक सके।
  4. अवधि: दस्त के लक्षण समाप्त होने तक बटी का उपयोग करें। यदि तीन दिनों के बाद भी लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श करें।


सुरक्षा और सावधानियाँ

  1. हालांकि दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा दस्त नाशक बटी एक सुरक्षित और प्राकृतिक घरेलू उपचार है, लेकिन कुछ सावधानियाँ बरतनी आवश्यक हैं:
  2. गर्भावस्था और स्तनपान: गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली महिलाएं बटी का सेवन करने से पहले फैमली डॉक्टर से जरूर सलाह करें।
  3. एलर्जी: यदि किसी सामग्री से एलर्जी हो, तो इसका उपयोग न करें।
  4. डॉक्टर की सलाह: यदि दस्त के साथ बुखार, खून की मल में उपस्थिति, या अत्यधिक निर्जलीकरण के लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें हो सके तो डॉक्टर या वेद की निगरानी में ही उपचार करे। 
  5. बच्चों के दस्त की दवा में उपयोग: बच्चों के लिए खुराक को आधा करें और किसी भी असुविधा के मामले में डॉक्टर से सलाह लें।
  6. पानी का सेवन: दस्त के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

बच्चों के दस्त की दवा- का घरेलु उपचार

ओषधि 

  1. अनार की काली 1 नग 
  2. सुद्ध अफीम 1/4 रत्ती ,
  3.  जायफल 1 नग 

बच्चों के दस्त की दवा का घरेलु उपचार

  •  बच्चो के दस्त (अतिसार),
  •  आमातिसार 
  •  ऐठन (मरोड़े या रुक रुक कर पेट में दर्द होना)

 क्या करना है - 

  1. आनर की कली को चाक़ू से बीच से चिर कर उसमे अफीम डालो। 
  2. उसके चारो और चिकनी मिटटी लगा कर उसको चारो ओर ढक लो 
  3. उसको कंडे (गोबर के बने हुए उपले ) की आग में पकाना है 
  4. जब आपको लगे की कली अच्छे से पक गयी है।
  5.  लगभग दस से पंद्रह मिनट के बाद कली को निकाल कर मिटटी को साफ कर ले।
  6.  अब कली को जायफल के साथ मिला कर खरल में पीस ले । 
  7. और जब गोली बने लायक हो जाये तो 1-1 ग्राम की गोलिया बना लो 

कैसे ले:-

  1.  दूध पीते बच्चों को माँ के दूध के साथ या फिर सहद के साथ देना चाहिए।
  2.  बड़े बच्चो को सहद के साथ या हलके गर्म पानी के साथ देना चाहिए। 
  3. अगर दस्त ज्यादा लगे हो तो इस घरेलु नुस्खे को चार -चार घण्टे के बाद भी दिया जा सकता है 
  4. अगर दस्त मामूली हो तो इस घरेलु उपचार से बनी दस्त रोकने की दवा का उपयोग सुबह शाम कर सकते है



निष्कर्ष

दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा दस्त - दस्त नाशक बटी एक प्राचीन और आयुर्वेदिक घरेलु उपचार है जो दस्त और संबंधित समस्याओं से तुरंत राहत प्रदान करता है। इसके प्राकृतिक और सुरक्षित तत्व पाचन तंत्र को संतुलित करते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह बटी न केवल दस्त से निपटने में मदद करती है, बल्कि पाचन तंत्र की समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार करती है। घरेलु नुस्खों व् घरेलु उपचारों की शक्ति को समझकर और उन्हें सही तरीके से उपयोग करके, आप स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

इस बटी को घर पर बनाना सरल है और इसे नियमित उपयोग में लाना लाभकारी है  जिससे आप और आपका परिवार स्वस्थ रह सके । दस्त रोकने का घरेलू नुस्खे में दस्त नाशक बटी की तैयारी और उपयोग के इस विस्तृत गाइड का पालन करके, आप अपने स्वास्थ्य को आयुर्वेदिक तरीके को अपना कर सुधार सकते हैं और दस्त जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। घरेलु आयुर्वेदिक उपचारों की पारंपरिक ज्ञान को अपनाकर और उसे अपने जीवन में शामिल करके, हम स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते हैं।



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  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. जले स्थान के लिए पारंपरिक मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
  13. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  14. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

दाद खाज खुजली की दवा क्रीम

 दाद खाज खुजली की दवा 

दाद की लिए घरेलू उपचार:- 

दाद जिसको रिंगवर्म के नाम से भी जाना जाता है यह एक सामान्य त्वचा संक्रमण होता है जो फंगस इन्फेक्शन के कारण पैदा होता है। इसके कारण त्वचा पर खाज-खुजली व् लाल रंग के धब्बे और जलन होने लगती है। दाद के इलाज के लिए कई प्रकार से मलहम और घरेलू उपचार हम कर सकते हैं लेकिन घरेलू नुस्खों से तैयार की जाने वाली दाद खाज खुजली की दवा क्रीम सभी को एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प लगता है। इस ब्लॉग पोस्ट के द्वारा हम आपको दाद के लक्षण, दाद के लिए घरेलू नुस्खे से दाद के लिए दवा तैयार करेंगे और एक घरेलू उपचार को पढ़ेंगे    

उपयोग और लाभ:-

1. प्राकृतिक तत्व: हर्बल मलहम में प्राकृतिक जड़ी बूटियों से बना घरेलू नुस्खा है जिसमे प्राकृतिक तत्व होते हैं जो त्वचा के लिए सुरक्षित होते हैं और साइड इफेक्ट्स की संभावना कम होती है।
2. एंटीफागल इन्फेक्शन: इनमें एंटीफंगल गुण होते हैं जो फंगस को खत्म करने में मदद करते हैं।
3. सुजस कम करना : हर्बल मलहम सूजन को कम करते हैं और त्वचा को शांत करते हैं।
4. त्वचा की देखभाल: ये मलहम त्वचा की देखभाल भी करते हैं और उसे स्वस्थ रखते हैं।

दादनसक दवा क्रीम से घरेलू उपचार करने के लिए यहाँ सरल विधिया निचे दी गई है:

1.    दाद नासक हर्बल मलहम की तैयारी:-

आवश्यक सामग्री:

नीम का तेल: नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं।
हल्दी पाउडर: हल्दी में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीफंगल गुण होते हैं।
टी ट्री ऑयल: टी ट्री ऑयल में शक्तिशाली एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं।
एलोवेरा जेल: एलोवेरा त्वचा को शांत करता है और हीलिंग प्रोसेस को तेज करता है।

तैयारी की विधि:

1.    एक छोटा कटोरा लेकर, उसमें 2 चम्मच नीम का तेल, 1 चम्मच हल्दी पाउडर, 5-6 बूँदें टी ट्री ऑयल और  चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं।
2. इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाएं, जब तक कि एक समान पेस्ट(cream) न बन जाए।
3. इस पेस्ट को एक साफ कांच के जार में स्टोर करें।

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2.   दाद खाज खुजली की दवा का घरेलू नुस्खा :-

उपचार :-

          यह दाद खाज खुजली की दवा क्रीम, दाद को अति शीघ्र ठीक  कर देती है. 

आवश्यक सामग्री:

  1.  कली व् चुना 5 तोले (55 ग्राम ) 
  2. पीली सरसो का तेल १५ तोले(160 ग्राम )  

तैयारी की विधि:

  1. सबसे पहले जहा आप ये घरेलू नुस्खा कर रहे है  वह जगह अच्छी तरह से साफ़ कर ले  और ध्यान रहे वह की हवा में, बर्तन में धूल  मीटी ना हो ।
  2.  अब बर्तन को ले, बर्तन लोहे या पथर का होना चाहिए  । 
  3. पीली सरसो 160 ग्राम का तेल को बर्तन में डाल ले 
  4. फिर उसमे चुना डाल कर उसको धीरे -धीरे बार बार मिक्स करते रहे  उसको लगभग आप ३ से ४ घटे तक मिलते रहे 
  5. यह परिक्रिया होने एक बाद उसको एक दिन तक रखा रहने दे उसके अगले दिन इस दाद की दवा को एक साफ़ डिब्बे में डाल कर रख ले   

उपयोग कैसे करे :

  1.  पहले दाद वाले स्थान को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें और सुखा लें
  2. थोड़ी मात्रा में मलहम लें और प्रभावित क्षेत्र पर धीरे-धीरे लगाएं। मलहम को त्वचा में अच्छी तरह से अवशोषित होने दें।
  3.  एक बार दिन में और एक बार रात में मतलब दिन -रात में 2-3 बार लगा ले ।         

सुरक्षा और सावधानियाँ:-

दाद खाज खुजली की दवा क्रीम: सुरक्षित होते हैं, लेकिन कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए:

एलर्जी टेस्ट: दाद खाज खुजली की दवा क्रीम का उपयोग करने से पहले एक छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपको किसी सामग्री से एलर्जी नहीं है।

स्वच्छता: प्रभावित क्षेत्र को हमेशा साफ और सूखा रखें।

संपर्क: अगर लक्षण बढ़ते हैं या सुधार नहीं होते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

निष्कर्ष:-

दाद खाज खुजली की दवा क्रीम एक सुरक्षित, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है जो दाद के संक्रमण को खत्म करने में मदद करता है। इसके प्राकृतिक तत्व त्वचा को स्वस्थ और साफ रखते हैं। इस दाद की दवा को घरेलू नुस्खे से आसानी से तैयार किया जा सकता है और नियमित उपयोग / घरेलू उपचार से दाद की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। घरेलू उपचार और घरेलू नुस्खों की शक्ति को समझकर और उन्हें सही तरीके से उपयोग करके, आप स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

गंधक का सिद्ध तेल :-

योग: - 

  • गंधक का चूरन ढाई तोले , 
  • कडुआ तेल ५ तोले 
  • और कपडा १ बड़ा पीस ले 

विधि :-

 गंधक के चूरन को कपडे पर फैलाकर एक बत्ती बना ले जब वह जलने लगे तब चिमटे से ऊपर उठाये और नीचे एक तेल कटोरे में उसमे से गिरने वाली तेल की बूंदो को इकठा करते जाये  बत्ती से जब तेल टपकना बंद हो जाए तब उस तेल को शीशी में रख ले 

गुण :- 

इसके व्यवहार से खुजली मिटती है 

उपयोग :-

खुजली वाली जगह पर इसकी मालिश करनी चाहिए 

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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
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जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा

 जोड़ों का दर्द 

जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा

जोड़ो का दर्द मतलब की joint pain या  घुटने  में दर्द  का होना .यह  समस्या अधिकतर बड़ी उम्र के लोगो को होती है, जो  लगभग  70% लोगो  में  कैल्शियम की कमी के कारण होता है, व्  30 % लोगो में कोई अन्य कारण  हो  सकता. जोड़ो का दर्द चलने व् घूमने पर और अधिक बढ़ जाता है. हम यहाँ पर जोड़ो के दर्द की आयुर्वेदिक दवा के बारे में पड़ेगे जिसे अपने घरेलु नुस्खे से अपने घर पर ही जोड़ो के दर्द का घरेलू उपचार करके जोड़ो के दर्द की आयुर्वेदिक दवा बना सके और जोड़ो के दर्द को ठीक किया जा सके 

ग्रंथि वात नाशक बटी:
जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवा 

जोड़ों के दर्द के लिए आयुर्वेदिक दवा "ग्रंथि वात नाशक बटी" का नाम पहले नंबर लिया जाता है है जो घरेलु नुस्खे से जड़ी बूटियों की मदद से आसानी से बनाई जा सकती है और इस दवाई को उपयोग गठिया जैसी समस्याओं का इलाज करने के लिए भी किया जाता है  यह आयुर्वेद का जोड़ो के दर्द के लिए रामबाण इलाज माना जाता है

 ग्रंथि वात नाशक बटी के बनाने के बहुत से अलग अलग तरिके है पर हम यहाँ केवल दो तरीको को जानेगे जो  जोड़ो के दर्द व् गाठो के दर्द के साथ और भी कई प्रकार के रोगो को दुर करने में मदद करेगा आपको जो घरेलू नुस्खा अच्छा या सरल लगे आप उसे अपना घरेलू उपचार कर सकते है  ।

ग्रंथि वात नाशक बटी क्या है 

ग्रंथि वात नाशक बटी एक आयुर्वेदिक दवा है जिसको प्राकृतिक जड़ीबूटियां को मिला कर बनाया जाता है इसमें मुख्या तोर पर गुग्गुल, शल्पर्णी, आमला, गुडूची, गुडमार और अन्य औषधीय पौधों होते है ,जो किसी भी पंसारी की दुकान पर  आसानी से उपलब्ध होते है यह प्राकृतिक उपाय होता है जो शारीरिक स्नायुविकार को समाता है और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है

 लाभ और उपचार 

  1.  गठिया रोग में और जोड़ों के दर्द: इस बाटी का उपचार गठिया रोग में और जोड़ों के दर्द में किया जाता है जो दर्द में राहत प्रदान करता है , 
  2.   वात के सभी रोगो: चुकी  ग्रंथि वात नाशक बटी को वात नाशक बटी भी कहा जाता है और वात के सभी रोगो के इलाज के लिए उपयोग  किया जाता है जैसे  र्थराइटिस और वातिक जोड़ों के दर्द
  3. संधियों को मजबूत करना:  यह बटी संधियों को मजबूत करके उन्हें लचीला बनाती है और उनकी स्थिति को सुधार सकती है।

ग्रंथि वात नाशक बटी का उपयोग कैसे  करना चाहिए :

1.    किसी वेद या आयुर्वेद डॉक्टर की सलाह पर इस बटी को नियमित रूप से लें।

2. इसको भोजन और योग के साथ उपयोग में लाये ताकि इसके लाभ बढ़ जाएं।

3. निश्चित मात्रा में ही इस बटी का उपयोग सही रहेगा, और अधिक मात्रा में न लें।


                                             दूसरा तरीका:-

ग्रंथि वात नाशक बटी को बनाने का दूसरा तरीका सीखते है  
ग्रंथि वात नाशक बटी को तैयार करने का तरीका :- 

सोरा (कलमी ) -१ तोला(11 ग्राम ) 
कत्था  -१ तोला(11 ग्राम ) , 
शुद्ध सफ़ेद संखिया (२.५ मासे) (2 .३ ग्राम ) 

बाटी बनाने का तरीका :-  ऊपर दी गयी सभी जड़ीबूटियों को एक बर्तन में डाल ले फिर एक ओखली ले पथर की ओखली सबसे बढ़िया रति है फिर ओखली में रख कर जल के साथ रख कर इसको कूट ले और इसके छोटे छोटे टुकड़े करे जब मेथी के दाने के जितने टुकड़े हो जाये तो  इनको  सूखा ले


लाभ और उपचार :

  1. रकत को साफ़ करने में मदद करता है , 
  2. गाँठो के दर्द व् जोड़ो के दर्द को कम करता है  
  3. मूत्र में अम्लता में भी ये वाली ग्रंथि वात नाशक बटी असरदार है
  4.  पेट की गैस में भी बहुत उपयोगी है , 
  5. खासी, जुकाम के उपचार के लिए लाभदायक  है 

 

उपयोग में कैसे लेना है  :- 

नास्ते के ३० मिनट बाद  गाय के 12 ग्राम घी के साथ मिश्रित करके  गाय का 1/4 लिटिर (एक गिलास ) दूध के साथ  ले। 

 नोट- ध्यान रहे दूध उबाल ही पिए स्वाद के लिए चीनी मिला सकते है. यह गाय या भैंस का घी न होने पर इसको माखन, दूध, मलाई के साथ और बादाम के हलवे के साथ भी दिया जा सकता है 

लने से पहले ध्यान रखे  :- अगर रोगी को गर्मी हो जैसे जलन, प्यास और सर में चकर इत्यादि  हो तो इसका इस्तमाल न करे।

नोट  : "ग्रंथि वात नाशक बटीआयुर्वेदिक चिकित्सा या घरेलू उपचार में  एक प्रमुख उपाय है जो जोड़ों के दर्द को कम करने में हमारी मदद करता है। इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर से जरूर जानकारी हासिल कर ले और सभी ऊपर दिए गए निर्देशों का पालन करें।



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
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  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
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आँखों की समस्याओं का रामबाण इलाज: आयुर्वेदिक उपचार

 आँखों की समस्याओं का रामबाण इलाज: आयुर्वेदिक उपचार  आँखें हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो हमें दुनिया को देखने की शक्ति देती हैं...