पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा

 पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा

 पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
पीलिया:-

पीलिया, जिसे अंग्रेजी में "Jaundice" भी कहा जाता है, पीलिया में त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला हो जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है। बिलीरुबिन एक पीले रंग का पिग्मेंट है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है।

पीलिया के कारण:

  • लिवर की समस्याएं: हेपेटाइटिस, सिरोसिस, लिवर कैंसर आदि।
  • रक्त विकार: रक्त कोशिकाओं का अत्यधिक टूटना (हेमोलिसिस)।
  • बाइल डक्ट अवरोध: गॉलस्टोन, ट्यूमर, या पैंक्रिएटिक कैंसर की वजह से बाइल डक्ट में रुकावट।

पीलिया के लक्षण:

  • त्वचा और आंखों का पीला होना:- यह पीलिया का सबसे स्पष्ट लक्षण है।
  • गहरे रंग का पेशाब:- बिलीरुबिन की अधिक मात्रा के कारण।
  • फीके रंग का मल:- बाइल की कमी के कारण।
  • त्वचा में खुजली:- शरीर में बाइल साल्ट्स की वृद्धि के कारण।
  • थकान और कमजोरी:- लिवर की खराबी के कारण।
  • भूख कम लगना:- लिवर की समस्याओं के कारण।
  • बुखार:- यदि पीलिया संक्रमण के कारण हो।
  • पेट में दर्द:- विशेषकर ऊपरी दाएँ हिस्से में, जो लिवर के क्षेत्र में होता है।

पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा:-

औसधि:-

  • सफेद पुनर्नवा की जड़,(जिसको आम भाषा में गध-बड़ कहा जाता है )
  • सोंठ
  • नीम की हरी छाल
  • ताज़ी गडूची
  • हल्दी
  • कुटकी
  • देवदारु
  • हरड़

ये आठों चीज़ो को तीन तीन माशे  ले 

विधि -

  • सभी को एक एक करके कूट ले या छोटे छोटे टुकड़े कर ले 
  • फिर एक मिट्टी या कलईदार बर्तन में ५००ग्राम पानी ले 
  • उन सब औसधि को लिए गए पानी वाले बर्तन में भिगो ले जिससे वो नरम और गल जाएगी 
  • सुबह लिए गए मिट्टी का या कलाई दार बर्तन में जिसमे औसधि को भीगोया है उसका काढ़ा पका ले 
  • जब पकने के बाद लगभग 125 ग्राम रह जाये तो उसको आग से उतार ले 
  • अब कपडे से छान कर उसको ठंडा होने के लिए रखे 
  • फिर उसमे लगभग ६ माशे ( ६ ग्राम ) मधु / सहद मिला ले 
  • इसकी लेने की यह एक मात्रा है 

गुण:-

  • यह काढ़ा पीलिये के इलाज में बहुत उपयोगी है 
  • सूजन में भी इस काढ़े को लिया जा सकता है जो आपकी सूजन को कम कर सकता है 
  • जिगर और तिल्ली को बढ़ने के कारण जो विकार उत्पन होगा जैसे की जलन, सूजन, बुखार तथा पसलियों के दर्द में आरामदायक है 
  • कब्ज तो तोड़ने में भी इस काढ़े का उपयोग किया जा सकता है 
  • यह घरेलु नुस्खा उदर की वृद्धि में हेल्पफुल है
  • इसको शरीर में अग्नि की मंदता दूर होती है पाचन सकती को बढ़ाता है 
  • कुछ सप्ताह इसको लेने से शरीर की निर्बलता दूर होती है और शरीर के बल में वृद्धि होती है 

मात्रा /समय:-

मात्रा:-इसको पांच तोले से दस तोले (५० ग्राम से १०० ग्राम )तक ही लेना सही होता है 

समय:-सुबह इस काढ़े को ताजा बना कर पीना चाहिए 

नोट:- 

  • ध्यान देने वाली बात की प्रसूता महिला(जिस महिला का बच्चा तीन महीने से छोटा है ) के शरीर में सूजन है तो इसका सेवन करने से लाभ उठाया जा सकता है 
  • अगर किसी को पतली टट्टी (लूज़ मोशन) हो रही हो तो उस समय इस काढ़े का उपयोग रोक दे 
  • इस काढ़े को लेने से पहले व तैयार करने से पहले किस डॉक्टर या वैद्य से परमर्श जरूर कर ले 
  • अगर आप पीलिये का आयुर्वेदिक उपचार काढ़े का उपयोग करके लाभ ले चुके है तो ओर से भी इस घरेलु नुस्खे को साझा करे 



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