सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज

सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज 
सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार रामबाण इलाज 

सिर दर्द एक आम समस्या है जो लगभग लोगो को हो ही जाती है चाहे तो वो काम की अधिकता के कारण, तनाव के कारण. अच्छी नींद न आने के कारण, खासी में, बुखार में, थकान में सिर दर्द हो जाता है कभी कभी दर्द इतना बड़ जाता है की सहन नहीं होता और कुछ लोगो में लगातार सिर दर्द होने से माइग्रेन की समस्या जन्म ले लेती है फिर न हमारे काम में हमारा इतना ध्यान जाता है और न ही मन को संतुष्टि मिलती है वैसे तो सिर दर्द के बहुत से घरेलू उपचार व् आयुर्वेदिक उपचार है जो आपको इंटरनेट के माद्यम से मिल जायेगे पर हम इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अलग अलग प्रकार के प्रचीन आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बात करेंगे जो एक प्रभावी, उपयोगी एक रामबाण इलाज है जिसका उपयोग बहुत पहले से होता आ रहा है और अब भी यह बहुत उपयोगी है

 तेजपात का डण्ठल से सिर दर्द का इलाज:-


औषधि :- 

  • तेजपात का डण्ठल ५ ग्राम ले 

क्या करना है :- 

  • तेजपात डण्ठलों को ले उसको पानी के साथ किसी सील या पत्थर पर बिलकुल महीन (बारीक) पीस कर रख ले  यह एक मात्रा है

उपचार  :-

  •  इसे सिर दर्द मीट जाता है 

उपयोग  :- 

  • सिर में जिस जगह दर्द हो रहा है वहाँ इसका मोटा लेप करना होता है लगभग आधे घंटे के बाद जब लेप सुख जाये तब उसको हटा ले 

नोट :-

दिहातों में यह उपचार सिर दर्द के समय व्यवाहर में लाया जाती है यह अब भी उतना ही सफल उपचार है  


 मुचकुन्द के फूल से सिर दर्द का इलाज:-

 औषधि:- 

  • मुचकुन्द के फूल १ तोला लगभग ११ ग्राम (अगर आप मुचकुन्द का पेड़ के बारे में नहीं जानते तो  इस ब्लॉग पोस्ट में नीचे व्यख्या दी गयी है  वहाँ से पढ़ कर आपको मुचकुन्द के पेड़ को पहचानने में आसानी होगी)

विधि :-

  •  मुचकुन्द के फूल को पानी के साथ बारीक़ पीस ले 

उपचार :- 

  • यह सिर दर्द का उपचार करता है 

उपयोग  :- 

  • सिर में जहा दर्द हो उस दर्द वाली जगह पर इसका मोटा लेप करना है
  •  लगभग आधे घंटे बाद सिर पर किया लेप जब थोड़ा गीला हो उसको दर्द वाले स्थान से हटा ले 
  • फिर से यही परिक्रिया सुरु करे यह एक दिन में दो से तीन बार करनी है 
  • फिर आपको अच्छा और सिर में ठंडक महसूस होगी 

नोट :-

 यह आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदीय शार्गंधर, भावप्रकाश आदि मान्य ग्रंथो में से लिया गया है 

मुचकुन्द का पेड़

मुचकुन्द का पेड़ साखू की तरह बहुत बड़ा होता है इसके पत्ते भी साखू की तरह ही होते है बसंत से गर्मी की ऋतू तक इस पेड़ में फूल आते है और पेड़ो के नीचे परिपक़्व फूल गिरे मिलते है वर्षा ऋतू में इसके फूल ख़त्म हो जाते है इसके फूलो दो से तीन इंच लम्बे ,पीले खुरदरे ,रोमयुक्त और चम्पा के फूलो के जेसे तीन और से फाँकदार होते है फूलो से मीठी और मनमोहन गंध निकलती है यह महक फूलो के सूखने से भी ज्यों की त्यों बनी रहती है निघन्टुओं में इसे चरपरा ,कड़वा ,गर्म ,स्वर को उत्तम बनाने वाला कफनाशक, खासी, त्वचा के विकार, शोथ, सिर का दर्द, त्रिदोष, रक्तपित, पित और रक्तदोषनाशक लिखा है पर सिर पीड़ा में यह बहुत उपयोगी माना गया है 



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