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 घरेलू नुस्खे

घरेलू नुस्खे क्या है

घरेलू नुस्खे : हम सोचते होंगे कि आजकल के समय में हमें किसी भी समस्या का सामना करने के लिए तत्परता के साथ एलोपैथी दवाओं का सहारा लेना चाहिएलेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने इससे पहले भी कई समस्याओं का सामना किया और उन्हें घरेलू उपायों ,घरेलू नुस्खे से हल किया थाप्राचीन काल मेंहमारे बुजुर्ग एलोपैथी दवाओं के बारे में नहीं जानते थेलेकिन उन्हें स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता थातो वे पेड़-पौधों के उपयोग या अपने खाने में उन उत्तम तत्वों का इस्तेमाल करते थेजैसे हल्दीकाली मिर्चआंवलापोदीनाजिन्हें उन्होंने वेदों में विस्तार से उल्लेख किया गया था। यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली को आयुर्वेद कहा जाता हैजो कि भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आयुर्वेद 

आयुर्वेद ही स्वास्थ्य की पुंजी है आयुर्वेद से ही निकाल कर आज हम कुछ घरेलू नुस्खे अपने जीवन में प्रयोग कर रहे हैं| कि हमारा स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहे और इसलिए हम अपने शरीर का ध्यान रखने के लिए अनेक प्रकार के आयुर्वेद-उपचार करते हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ छोटी-छोटी समस्याएं बाद में बड़ा रूप ले लेती है  जिसके बाद वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी बन सकती है। ऐसी छोटी बीमारी का समय रहते हम अपने घर में घरेलू नुस्खे, एवं आयुर्वेद की सहायता से उपचार कर सकते हैं। इसलिए, अधिकांश लोग अपने लंबे जीवन के लिए आयुर्वेद की ओर आकर्षित होते हैं। आयुर्वेद एलोपैथी की तुलना में सस्ता होता है और इसके उपयोग से किसी भी साइड इफेक्ट का डर नहीं रहता है। इसके अलावा, यह सभी घर पर उपलब्ध होता है, जिससे हम किसी भी समस्या का आसानी से इलाज कर सकते हैं।

इस प्रकार, घरेलू नुस्खे  न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होते हैं, बल्कि यह हमें प्राचीन चिकित्सा प्रणाली की अमूल्यता को समझने का भी माध्यम प्रदान करते हैं। इसलिए, हमें इन्हें अपने जीवन में शामिल करने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।

धतूरे की भस्म 

उपचार:- दामे में काम आता है

क्या करना है:-

  •  मिटटी की हांड़ी में धतूरे के पके ताजे फल डालकर ढकन से उसका मुँह बंद कर दे । 
  • संधि पर कपड़मिटटी कर गजपुट में फुक दे एक ही पुट में अन्तधूर्म दग्ध काली भस्म बन जाएगी 
  • और उसको कूट कर कपडे मे छान कर रख ले 

कैसे ले:- 

इसको एक से दो रती तक भस्म मधु/ सहद के साथ लेना चाहिए सधारण तोर पर इसको सुबह और शांयकाल को लेना चाहिए अगर रोग अधिक है तो एक एक मात्रा में चार चार घंटे के बाद लिया जा सकता है दो रत्ती इसकी पूर्ण मात्रा है बच्चो और दुर्बल को उनकी उम्र का अंदाजा लगा कर इसकी मात्रा को दिया जाना चाहिए 

वात नाशक बटी उपचार 

उपचार:-

  •  दस्त (अतिसार ) 
  • उदरशूल (पेट दर्द) 
  • वातनाशक 

औसधी :- 

शुद्ध हींग , शुद्ध अफीम जायफल और माजूफल १-१ तोला(१२ ग्राम )

क्या करना है :-

  • जयफल और मजुफल को कूट और कपड़छन कर खरल में रखे।
  • ऊपर से हींग और अफीम डाल दे उसको अच्छे से मसले 
  • अच्छे से मिल जाने के बाद जल डाल कर एक गोली बनाने लायक हो जाये 
  • तो उसको मुंग के दाने के बराबर गोलिया बना ले 

.कैसे ले:- 

शाम १-१ बटी पक्के केले या शीतल जल से लेनी चाहिए 

सौंठ का चूरन 

उपचार :-

 पेट रोग के लिए ( उदर- रोग )

औसधि :- 

सौठ, पीपरामूल, गजपीपल, हल्दी, कटेरी, सफ़ेद जीरा , चित्रक जड़ की छाल और नागरमोथा (५-५ तोले[६० ग्राम])

क्या करे :- 

इन सब की कूट कर कपडाछन कर पात्र (बर्तन) में रख ले

नोट:- खाली पेट सुबह (६ मसे ) दोपहर और शाम में (१ मासे ) गर्म पानी के साथ ले.


ग्रंथि वात नाशक बटी 

उपचार:-

 रकत को साफ़ करता है, गाँठो के दर्द, मूत्र में अम्लता, गैस नासक, खासी, जुकाम 

औसधि :- 

सोरा (कलमी )और कत्था १-१ तोला 

शुद्ध सफ़ेद संखिया (२.५ मासे)

क्या करना है :- 

इनको खरल में रख कर जल के साथ रख कर इसके छोटे छोटे टुकड़े करे 

मेथी के दाने के जितने टुकड़े होने पर इसको सूखा ले 

 कैसे लेना है :-

 नास्ते के ३० मिनट बाद गाय के १२ ग्राम घी के साथ मिक्श् करके गाय का १/४ लिटिर दूध के साथ ले। 

 नोट:- ध्यान रहे दूध उबाल ही पिए स्वाद के लिए चीनी मिला सकते है. गाय या भैंस का घी न होने पर इसको माखन दूध मलाई के साथ और बादाम के हलवे के साथ भी दिया जा सकता है  अगर रोगी को गर्मी हो जैसे जलन प्यास और सर में चकर इत्यादि हो तो इसका इस्तमालकरे

.दाद नासक मलहम 

उपचार :-

 दाद का शीघ्र इलाज

औषधि :-

 कली /चुना ५ तोले और पीली सरसो का तेल १५ तोले ले। 

क्या करे :-

 तेल को बर्तन( लोहे या पथर का खरल ) में रख कर उसमे चुना मिक्श् कर ले और लगभग ३ से ४ घंटे तक उसको मिलते रहे। एक दिन रखे रहने के बाद उसको एक डिब्बे में रख ले

उपयोग कैसे करे :-

दाद वाले स्थान को साफ़ करने के बाद दिन-रात में एक से दो बार लगाना चाहिए।

उदरशूल नाशक जंबीरी (निम्बू) प्रयोग 

उपचार :- 

नाभि, पसली, और ह्रदय का दर्द, पेट दर्द , वातगुल्म , आफरा, मॉल की गाठ, तल्ली जिगर, वात और कफ से सम्बन्धित उदर रोग मंदाग्नि और अरुचि का नास होता है। यह सभी ऐज ग्रुप वल्लो के लिए लाभदायक है । 

 औषधि :-

जंबीरी /नीबू का रस ( ६ १/४ सेर) सेंधा नमक ( २ छटाँक) शुद्ध हींग (२ छटाँक ) कांचनमक, सोंठ, काली मिर्च, बड़ी पीपल और अजवायन (६-६ तोले )

क्या करे :- 

पथर के पात्र में एक छटाक पिसा सेंधा नमक डाल कर ऊपर से कपडे से छना निम्बू का रस डाले। कुछ समय मिटटी के बर्तन में उबाले, झाग आ जाने पर उतार कर ठडा कर ले। फिर एक घी के पुराने पात्र में उस रस को रख, ऊपर से शेष चीजों का कपड़ाछान किया चूर्ण डाल कर मिलाये। ढकन को अच्छे से बंद करके उसको घोड़े की लीद डले गड्डे में एक महीने तक दबा कर रखे। एक महीने के बाद बर्तन या घड़े को निकल कर जल से पहले धो ले। इसके बाद ढकन हटा कर कपडे में छान कर बोतल में रख ले 

उपयोग कैसे करे :- 

सिर्फ २ तोला ही बराबर जल के साथ भोजन के बाद लेना चाहिए। 

( विशेष कष्ट के समय ४-४ घंटे पर दिन में ४ बार ही लेना चाहिए )\

दस्त नाशक बटी

ओषधि :-

 अनार की काली १ नग सुद्ध अफीम १/४ रत्ती , जायफल १ नग 

उपचार:- 

बच्चो के दस्त (अतिसार), आमातिसार और ऐठन 

 क्या करना है :- 

अनार की कली को बीच से चिर कर उसमे अफीम डालो। उसके चारो और चिकनी मिटटी लगा कर उसको कंडे की आग में पकाना है जब आपको लगे की कली पक गइ। लगभग १० -१२  मिनट के बाद उसे निकल कर मिटटी साफ कर ले। जायफल को खरल में पीस ले । और जब गोली बनने लायक हो जाये तो १-१ ग्राम की गोलिया बना लो

 कैसे ले :- 

दूध पीते बच्चे को माँ के दूध के साथ या फिर सहद के साथ देना चाहिए। बड़े बच्चो को हलके गर्म पानी के साथ देना चाहिए। अगर दस्त ज्यादा लगे हो तो ४-४ घंटे बाद भी दिया जा सकता है

 जीरा चूर्ण का प्रयोग 

उपचार:- 

स्त्रियो के ऋतू का अवरोध, हल्का बुखार, पतली टट्टी, मदाग्नि वन्ध्यापन, बच्चे का न होना शाररिक दुर्बलता। 

औषद्धि :-

सफ़ेद जीरा लगभग ५ तोल। 

 क्या करे:-  

थोड़ी देर धुप में सूखाने के बाद कूट ले। उसके बाद कपडे से छानकर बोतल में भर ले।

 उपयोग कैसे करे:-

९ मासे। बकरी के २५० ग्राम दूध के साथ सुबह और शाम दोनों समय समान मात्र में ले। 

नोट :- जीरा दिमाग के लिए लाभदायक गर्भस्य को सुद्ध करने वाला, जवार नाशक, पाचन में, वीर्यवर्धक, रुचिकारक, कफनाशक, आखो के लिए भी हितकारी है। यह पेट की वायु, तनाव, गुल्म , वमन और अतिसार नाशक भी है 

शीत ज्वर पर विजय योग :-

उपचार:-  

शीत ज्वर 

औसधि :-

विजय (भांग)  २ रत्ती, काली मिरच ११ दान।  

क्या करना है:-

दोनों की जल के साथ पीस कर गोली बना ले। 

कैसे ले :- 

ज्वर आने से दो -तीन घंटे पूर्व गर्म जल से खानी चाहिए। बच्चो को उनकी उम्र के हिसाब के कम करके देनी चाहिए 

 उदर शूल नसक पोटली 

उपचार:-

 उदर शूल (पेट का दर्द )

ओषधि :- 

कला तिल, अजवाइन, बड़ी हर्रे का बक्क्ल, समुंद्ररी नमक (२-२ तोले ) और ६ तोले गनने का पुराना सिरका

 क्या करना है :-

सुखी चीजों को कूट ले। कूटने के बाद सिरके में मिला ले। और बड़े मुँह वाले सीसे के बर्तन में रख ले। 

कैसे ले:-

दर्द के वकत इस ओषधि को एक कपडे के ऊपर रख कर पोटली बना ले। मंद आँच में तवे पर रख कर पोटली को गर्म करे। पेट में दर्द वाली जगह पर हल्का पतला कपडा रख कर पोटली से धीरे धीरे सेंक लगाए। हो सके तो दो पोटली बना ले एक तवे पर रखी तो दूसरी एक के साथ पेट पर सेंक करे । यह कर्म आधा घंटे तक चलने दो।

खांसी पर काढ़ा

ओषधि :- 

लिसोड़े के पते, काली मिर्च, काला मुनक्का ७-७ नग और मिश्री १ तोला व् जल आधा सेर ले। 

उपचार :- 

बलगम वाली खासी 

क्या करे:-

 मिश्री को छोड़कर बाकि सभी चीज़ो को कूट ले। फिर जल में पकने के लिए डाल दे। एक छँटाक रहने पर उतार ले। और उसमे मिश्री डाल ले। अब हल्का गर्म रहने पर उसको कपडे से छान कर चीनी मिटटी या फिर सीसे के बर्तन में डाल कर रख ले। 

कैसे ले :- 

सुबह- साम इस काढ़े को तैयार करने पश्चात तुरंत कुछ गुनगुना हो जाने पर ही उपयोग करना चाहिए।

 गेंहू का तेल

 ओषधि:- 

 गेंहू २५० ग्राम 

उपचार :-  

चर्मरोग, खसरा 

क्या करे:-

गेंहू को अंगारे पर रख कर जलने दे। गेंहू के जलने के समय उनको उठा कर लोहे की चादर व लोहे की रोड से दबा दे। दबाने से जो तेल निकलेगा उसको सावधानी से किसी काच की सीसी में डाल ले। 

उपयोग कैसे करे:-

गजचार्म हो या इस प्रकार के कोई भी चर्म रोग हो , उस पर कुछ दिनों तक सुबह उठ कर एक से दो बार लगाना चाहिए। 


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