आँखों की समस्याओं का रामबाण इलाज: आयुर्वेदिक उपचार

 आँखों की समस्याओं का रामबाण इलाज: आयुर्वेदिक उपचार 

आँखें हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो हमें दुनिया को देखने की शक्ति देती हैं। हालांकि, आँखों में व् आँखों की ऊपरी पलकें कई समस्याओं से प्रभावित हो सकती हैं। इन समस्याओं को हल करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार और घरेलु उपायों का उपयोग किया जा सकता है। आइए जानते हैं क आँखों की समस्या को किस प्रकार से दूर कर सकते है हम जानेगे ऐसे उपाय जो आँखों की ऊपरी समस्याओं के लिए लाभकारी हो सकते हैं। अथवा हम यहाँ आयुर्वेदिक औषदीयों की साहयता से एक ऐसा घरेलु लेप तैयार करेंगे जो आँख की हर समस्या के लिए बेहतर होगा जो आंखो के दर्द, आखो का चिपकना के साथ साथ आँखों की रौशनी को भी सुधर करेगा 

 आँखों की समस्याओं का रामबाण इलाज

आंखो के दर्द के लिए आयुर्वेदिक लेप:- 

जो औषधि लेनी है वो निमन्नलिखित है   

औषधि:-

    • कासनी  (यह महीने के बारह महीने उगने वाला पौधा है जिसको चिकोरा भी कहा जाता है इसके नीले फूल होते है)   मात्रा :- लगभग ७ ग्राम 
    • काहू के बीज     (जिसको दो ओर नाम से जाना जाता है  प्रिक्ली लेट्यूस और वाइल्ड लेट्यूस  । पर इसको आम भाषा में खास, काहू साल्ट, काहू सलाद, काहू जीरा,सलीट भी कहा जाता है ।  मात्रा :- लगभग ७ ग्राम 
    • रसौती   (रसौती को दारुहरिद्रा से तैयार किया जाता है |) मात्रा :- लगभग ३/२ ग्राम 
    • अफीम    मात्रा :- लगभग ३/२ ग्राम 
    • इसबगोल  मात्रा:- लगभग 3 ग्राम 

विधि :-

  • आखो के दर्द के लिए लेप बनाने के लिए सबसे पहले खरल ले 
  • खरल में कासनी, काहू के बीज और रसौती इन तीन चीज़ो को डाल ले और कूट ले 
  • कुछ टाइम बाद कूटने के बाद देखे की वो बारीक़ (महीन) हो चुकी है तो उसको निकल ले 
  • अगर वो मिक्सचर महीन नहीं पीसा है तो दोबारा कूट कर अथवा पीस है महीन (बारीक़ ) करे 
  • एक चमच पानी ले कर और अफीम में मिला ले
  • और अफीम को आग पर खौलाकर गाढ़ा लेप बना ले 
  • फिर छोटे चार चमच पानी के साथ इसबगोल मिला ले या भिगो दे |
  • घंटेभर बाद साफ़ कपडे से छान कर या मसलकर उसका लूआब निकाल ले
  • अब इस लुआब में सभी चिच्जो को एक एक करके मिक्स कर ले 
  • मिक्सचर एक सा हो व् अच्छे से मिक्स हो ये जरूर कन्फर्म कर ले 
  • उस बने मिक्सचर को एक साफ़ सुथरे बर्तन में ढक कर रख ले 

उपयोग कैसे करे :-

  • एक 5 ग्राम तक कपडे की बनी गोल पट्टी ले ले 
  • उसके ऊपर गाढ़ी तह लेप की चढ़ा ले 
  • उसको आँखे से दोनों कनपटियों तक साटना है (रखना है)
  • यह लगभग दो से चार घंटे तक नहीं हटानी चाहिए
  • जब  भी दो से चार घंटे बाद हटाएंगे तो दोबारा यह परिक्रिया करनी है  

लाभ व् उपचार :-

  • इसका उपयोग आँख में आने वाली लाली में किया जाता है यह उसमे राहत पहुँचता है 
  • इसका उपयोग आँख में होने वाले दर्द में भी राहत दिलाता है 
  • अगर पलके आपस से चपकति है तो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है 
  • आँखों में कीचड़ आने की समस्या के लिए भी इस लेप का उपयोग किया जा सकता है 
  • आखो की रोशनी का अच्छा न मालूम होने भी यह उपचार राहत दिला सकता है 

नोट:-

  • आँखों के लिए उपचार करते समय पूर्ण तरिके से जान कर समझ कर ही इसका उपचार करे 
  • कोई भी उपचार करते समय एक बार डॉक्टर से परमर्श जरूर ले ले 
  • और उपचार के समय शास्त्र कथित व् बड़े बजुर्गो के द्वारा कही बातो (परहेज )का भी पालन करे 


आँखों के लिए आम घरेलु नुस्खे :-

कुछ आपके सुने सुनाये प्रमुख घरेलु नुस्खे जो आमतौर पर लोग अपनी आँखों को आराम पहुंचने लिए करते है जिसमे से कुछ आप जानते हो  

गुलाब जल:-

गुलाब जल का उपयोग आँखों की ऊपरी पलक की सूजन और थकान को दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है। इसे आँखों पर लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। इससे आँखों को ठंडक मिलती है और सूजन कम होती है।

खीरे के टुकड़े:-

खीरे के टुकड़े को आँखों पर रखने से आँखों की ऊपरी पलक की थकान दूर होती है और ठंडक मिलती है। इसे 15-20 मिनट तक रख सकते हैं।

 टी बैग्स:-

उपयोग किए गए टी बैग्स को फ्रिज में ठंडा करके आँखों पर लगाने से सूजन और जलन में राहत मिलती है। कैमोमाइल और ग्रीन टी बैग्स विशेष रूप से लाभकारी होते हैं।

एलोवेरा जेल:-

एलोवेरा जेल को आँखों की ऊपरी पलक पर लगाने से जलन और सूजन में आराम मिलता है। यह त्वचा को ठंडक पहुँचाने और उसे नमी प्रदान करने में मदद करता है।

गर्म पानी की सिकाई:-

गर्म पानी में एक कपड़ा भिगोकर आँखों पर रखने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और आँखों की ऊपरी पलक की सूजन कम होती है। इसे दिन में दो बार कर सकते हैं।

हल्दी और दूध:-

हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। हल्दी पाउडर को दूध में मिलाकर आँखों की ऊपरी पलक पर लगाने से सूजन और लालिमा कम होती है। इसको किसी भी चोट लगने के बाद भी लिया जा सकता है इसको गोल्डन मिल्क के नाम से भी जाना जाता है  

 गाजर का रस:-

गाजर के रस में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे नियमित रूप से पीने से आँखों की समस्याओं में कमी आती है।

संतुलित आहार:-

आँखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन और मिनरल्स युक्त संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है। हरी सब्जियाँ, फल, नट्स और बीज आँखों के लिए लाभकारी होते हैं।

इन सभी उपायों को आजमाकर आप भी अपनी आँखों की समस्याओं को आसानी से दूर कर सकते हैं। आयुर्वेदिक व् घरेलु उपाय न सिर्फ सुरक्षित होते हैं बल्कि इनके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होते। इसको शेयर करें और अपने दोस्तों तक भी इन उपायों से अवगत कराएं।

आपकी आँखें स्वस्थ और सुंदर रहें!








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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. जले स्थान के लिए पारंपरिक मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज 
  14. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  15. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  18. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

भूख लगना एक नेचुरल प्रोसेस है हमारे शरीर को एनर्जी भोजन से ही मिलती है जो हमारे शरीर की ज़रूरत को दर्शाती है लेकिन अगर हम खाना न खाये तो शरीर कमजोर पड़ने लगता है शरीर में पोषक तत्त्व कम होने लगते है और उनकी कमी से शरीर में कुछ रोगो का होना भी साधारण है लेकिन कुछ लोगों को अक्सर भूख नहीं लगती जो उनके स्वस्थ्य को प्रभावित कर सकती है.- इस ब्लॉग में हम जानेंगे की आखिर क्या कारण हो सकते हैं की कुछ लोगों को भूख नहीं लगती और उसके उसके बाद इसका घरेलु नुस्खा की कैसे अजवाइन की बर्फी एक घरेलु उपचार के रूप में हमारी मदद कर सकती है इस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानेगे 



भूख न लगने के कारण :-

तनाव और एंग्जायटी:-

अधिकतर लोग जब स्ट्रेस में होते हैं तो उनका भूख लगना कम हो जाता है एंग्जायटी भी भूख पर प्रभाव डाल सकती है 

बीमारी :-

कुछ बीमारियां जैसे की डायबिटीज, थाइरोइड डिसऑर्डर्स (thyroid disorders) या क्रोनिक ईलनेसेस (chronic illnesses ) के कारण भी रोगी को भूख कम लग सकती हैं

केमिकल दवाईयां:-

कुछ केमिकल दवाईयां साइड इफेक्ट्स के रूप में भूख कम कर देती हैं.

आदत :-

कभी कभार हम खुद इसके जमीदार होते है जेसे अनहेल्थी लाइफस्टाइल (unhealthy lifestyle)भी भूख कम लगने का कारण हो सकते हैं

अजवाइन की बर्फी:भूख बढ़ने का घरेलु उपाय:-

औषधि:- 

  • बड़े दाने वाली अजवाइन 55 से 60 ग्राम 
  • कागजी निम्बू का रस 100 स110 ग्राम 

  • चीनी 1000 ग्राम 

अजवाइन की बर्फी बनाने की विधि:-

  •   अजवाइन को अच्छे से साफ़ कर लो 
  • साफ़ करने के बाद किसी शीशे या पत्थर के बर्तन में डाल ले
  • अब लिया गया निम्बू का रस डाल दे और उसको अच्छे से मिलाये 
  • कुछ टाइम के बाद देख ले की रस अच्छे से मिल चूका है 
  • अजवाइन के दानो को ओर सूखने के लिए धुप में डाल दे
  • सूखने के बाद उसको कपडे या बारीक छन्नी के साथ छान ले
  • फिर चीनी में पानी डाल कर चाशनी बना ले
  • एक तार की चासनी तैयार कर ले
  • चाशनी में अजवाइन डाले और मिला ले 
  • कुछ टाइम तक उसको मिलते रहे 
  • जब आपको लगे की यह गाढ़ी हो गयी है तो घुमाना बंद कर दे
  • उसको अब किसी थाली जैसे बर्तन में डाल कर बर्फी जमा दे 
  • सुख जाने के बाद काट कर निकाल ले 
  • और किसी साफ़ बर्तन में रख ले 



 उपयोग :-

  • इसका कुछ दिनों तक नियम पूर्वक सेवन करे 
  • आप देखगे की आपको भूख अधिक लग रही है
  • और खाया पिया भी अच्छे से पच रहा है और जल्दी पच रहा है  
  • पेट के रोग शांत हो रहे है 
  • पुरे शरीर में फेल रही वायु भी की हालत सुधर रही है

मात्रा :-

  • इसको लगभग ५ ग्राम से १० ग्राम तक लेना सही रहता है 
  • इसका सेवन गर्म पानी को ठंडा करने के बाद उसके साथ सुबह और शाम या फिर शाम को न लेकर रात को भी ले सकते है   



अजवाइन की बर्फी के फायदे:-

  • अजवाइन पाचन शक्ति को सुधरने में मदद करती है और भूख को बढाती है
  • अजवाइन की बर्फी स्वादिष्ट के साथ आयुर्वेदिक उपचार भी है जो आपको दिन भर एनर्जेटिक रखती है
भूख नहीं लगना एक सीरियस इशू बन सकता है अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाये अजवाइन की बर्फी एक टेस्टी और इफेक्टिव घरेलु उपाय है जो पाचन शक्ति को सुधरने और भूख बढ़ने में मदद करती है

ध्यान रखने वाली बात 

पौष्टिक भोजन :-

अपने रोजाना के भोजन को हेल्थी रखे, भोजन में सलाद का उपयोग करे,अधिक तला हुआ और बासी भोजन खाने से परहेज करे  

योग और मेडिटेशन :-

योग और मैडिटेशन को अपनी रेगुलर एक्सरसाइज में शामिल करें. प्रणयाम सुबह शाम करने से भी लाभ होगा 

डॉक्टर से सलाह:-

अगर भूख नहीं लगने की समस्या लम्बी चल रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

समय :-

अपने खाने के समय को भी ध्यान में रख कर भोजन करना चाहिए देर रात को भोजन न करे भोजन करने का सही समय सूर्य उदय और सूर्य अस्त है सुबह भर पेट भोजन व् रात को हल्का भोजन करना चाहिए 

भूख नहीं लगना एक सीरियस इशू बन सकता है अगर इसपर ध्यान नहीं दिया जाये ज़रूरत है की हम अपने लाइफस्टाइल और हेल्थ पर ध्यान दें और समस्या के असली कारण को समझ कर उसका उपाय करें.



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
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  14. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  15. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  18. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज

अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज 

अस्थमा:-

आप जानते है की अस्थमा (दमा) एक बहुत ही खतरनाक बिमारी है जिसको समय रहते ठीक ना किया जाये तो जान लेवा बन जाती है यह रोग भिन्न भिन्न कारण से हो सकता है जिसके कारण हमारे शरीर के फेफड़े फूलना बंद हो जाते है या ये कहे की सांस लेना बंद कर देते है या बहुत कम लेते है जिसका एक कारण फेफड़े में सूजन भी होता है फेफड़े में सूजन का कारण धूम्रपान भी हो सकता है 

अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज


अस्थमा (दमा) से घर्षित लोगो को धूल मिट्टी और धुएं से एलर्जी होने लगती है व् सांस लेने में तकलीफ होने लग जाती है तेज भागने पर, पहड़ो पर चढ़ने पर ,साइकल चलाने पर, अधिक देर तक रोड पर चलने पर भी उनका सांस फूलने लगता है  जो लोग सिगरेट पीते है उनको यह समस्या अधिक होती है 


इस ब्लॉग पोस्ट में अस्थमा का उपचार "सिगरेट बना कर" "उसको उपयोग में ला कर" ही ठीक करेंगे जो लोग सिगरेट पीते है उनके लिए यह आयुर्वेदिक उपचार सबसे बढ़िया है वैसे तो हमने अस्थमा (दमा) के लिए धतूरे की काली भस्म के बारे में बताया है जिसका लिंक दिया गया है -आप ( ''अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज'')  पर क्लिक करके जानकारी हासिल कर सकते है पर हम यहाँ धतूरे का प्रयोग करके अस्थमा के आयुर्वेदिक उपचार के लिए  सिगरेट बनाएगे 

औसधि:-

  •  काले धतूरे का पंचांग(जड़, फल ,फूल ,पत्ता ,और डाल)
  • भांग और 
  • कलमीशोरा

 पांच पांच तोले लेना है 

विधि :-

  • धतूरे का पंचांग (जड़, फल ,फूल ,पत्ता ,और डाल) को तोडना है 
  • इन सब के छोटे छोटे टुकड़े कर लो 
  • अब भांग को इनके साथ मिला कर कूट लो
  • कोई भी तार वाली छलनी से छान कर चूर्ण को अलग कर लो 
  • अब एक तामचीन ,कठाया पत्थर के बर्तन में चूर्ण डाल ले 
  • अलग से कलमीशोरा ले उसमे थोड़ा सा जल मिला ले 
  • बर्तन में रखा चूर्ण में पानी में मिला कलमीशोरा मिला ले
  • अगर अच्छे से ना मिले तो पानी के छींटे मार मारकर दोबारा मिलाये
  • अच्छे से मिलने के बाद चूर्ण कुछ मुलायम सा लगेगा 
  • एक छोटा सिगरेट बनाने वाले कागज़ लो
  • कागज में थोड़ा चूर्ण रख कर लेई या अरारोट से उसे साट दे 

आयुर्वेदिक सिगरेट के लाभ :-

 

  • इसको लेने से या पीने से अस्थमा या दमे का दौरा रुक जाएगा 
  • रोगी को नींद भी अच्छी आएगी 

उपयोग:-

जिस दिन दमे का या अस्थमा का दौरा हो या दमे/अस्थमा के जोर पकड़ रहा हो  उस वक्त एक सिगरेट पीकर ऊपर से एक या दो गिलास गाये का गुनगुना दूध पीना चाहिए इस औषदि या घरेलु उपचार में धतूरा और भांग है  इसकी खुश्की को दूध ही दूर कर सकता है 

नोट :-

दूध के साथ लेने से औषधि की गर्मी के कारण रोगी को जो बेचैनी सी होने लगती है वो नहीं होती इसलिए दूध के साथ ही लेने को कहा जाता है 

इसका उपयोग सोच समझ कर ही करना चाहिए 

यह और्वेदिक उपचार करने से पहले और लेने से पहले डॉक्टर या वैध का परामर्श जरूर ले   




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  14. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  15. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  18. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा

 पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा

 पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
पीलिया:-

पीलिया, जिसे अंग्रेजी में "Jaundice" भी कहा जाता है, पीलिया में त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला हो जाता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है। बिलीरुबिन एक पीले रंग का पिग्मेंट है जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने पर बनता है।

पीलिया के कारण:

  • लिवर की समस्याएं: हेपेटाइटिस, सिरोसिस, लिवर कैंसर आदि।
  • रक्त विकार: रक्त कोशिकाओं का अत्यधिक टूटना (हेमोलिसिस)।
  • बाइल डक्ट अवरोध: गॉलस्टोन, ट्यूमर, या पैंक्रिएटिक कैंसर की वजह से बाइल डक्ट में रुकावट।

पीलिया के लक्षण:

  • त्वचा और आंखों का पीला होना:- यह पीलिया का सबसे स्पष्ट लक्षण है।
  • गहरे रंग का पेशाब:- बिलीरुबिन की अधिक मात्रा के कारण।
  • फीके रंग का मल:- बाइल की कमी के कारण।
  • त्वचा में खुजली:- शरीर में बाइल साल्ट्स की वृद्धि के कारण।
  • थकान और कमजोरी:- लिवर की खराबी के कारण।
  • भूख कम लगना:- लिवर की समस्याओं के कारण।
  • बुखार:- यदि पीलिया संक्रमण के कारण हो।
  • पेट में दर्द:- विशेषकर ऊपरी दाएँ हिस्से में, जो लिवर के क्षेत्र में होता है।

पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा:-

औसधि:-

  • सफेद पुनर्नवा की जड़,(जिसको आम भाषा में गध-बड़ कहा जाता है )
  • सोंठ
  • नीम की हरी छाल
  • ताज़ी गडूची
  • हल्दी
  • कुटकी
  • देवदारु
  • हरड़

ये आठों चीज़ो को तीन तीन माशे  ले 

विधि -

  • सभी को एक एक करके कूट ले या छोटे छोटे टुकड़े कर ले 
  • फिर एक मिट्टी या कलईदार बर्तन में ५००ग्राम पानी ले 
  • उन सब औसधि को लिए गए पानी वाले बर्तन में भिगो ले जिससे वो नरम और गल जाएगी 
  • सुबह लिए गए मिट्टी का या कलाई दार बर्तन में जिसमे औसधि को भीगोया है उसका काढ़ा पका ले 
  • जब पकने के बाद लगभग 125 ग्राम रह जाये तो उसको आग से उतार ले 
  • अब कपडे से छान कर उसको ठंडा होने के लिए रखे 
  • फिर उसमे लगभग ६ माशे ( ६ ग्राम ) मधु / सहद मिला ले 
  • इसकी लेने की यह एक मात्रा है 

गुण:-

  • यह काढ़ा पीलिये के इलाज में बहुत उपयोगी है 
  • सूजन में भी इस काढ़े को लिया जा सकता है जो आपकी सूजन को कम कर सकता है 
  • जिगर और तिल्ली को बढ़ने के कारण जो विकार उत्पन होगा जैसे की जलन, सूजन, बुखार तथा पसलियों के दर्द में आरामदायक है 
  • कब्ज तो तोड़ने में भी इस काढ़े का उपयोग किया जा सकता है 
  • यह घरेलु नुस्खा उदर की वृद्धि में हेल्पफुल है
  • इसको शरीर में अग्नि की मंदता दूर होती है पाचन सकती को बढ़ाता है 
  • कुछ सप्ताह इसको लेने से शरीर की निर्बलता दूर होती है और शरीर के बल में वृद्धि होती है 

मात्रा /समय:-

मात्रा:-इसको पांच तोले से दस तोले (५० ग्राम से १०० ग्राम )तक ही लेना सही होता है 

समय:-सुबह इस काढ़े को ताजा बना कर पीना चाहिए 

नोट:- 

  • ध्यान देने वाली बात की प्रसूता महिला(जिस महिला का बच्चा तीन महीने से छोटा है ) के शरीर में सूजन है तो इसका सेवन करने से लाभ उठाया जा सकता है 
  • अगर किसी को पतली टट्टी (लूज़ मोशन) हो रही हो तो उस समय इस काढ़े का उपयोग रोक दे 
  • इस काढ़े को लेने से पहले व तैयार करने से पहले किस डॉक्टर या वैद्य से परमर्श जरूर कर ले 
  • अगर आप पीलिये का आयुर्वेदिक उपचार काढ़े का उपयोग करके लाभ ले चुके है तो ओर से भी इस घरेलु नुस्खे को साझा करे 



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  18. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  19. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

 

पेट की गैस का घरेलु उपचार -रोचक चूरन

पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण 


रोचक चूरन:- 
पेट की गैस का घरेलु उपचार -रोचक चूरन 

 स्वादिष्ट चूर्ण जिसको रोचक चूरन भी कहा जाता है और बच्चे जवान और बुड्ढे भी इसको बहुत पसंद करते है यह करियाने की दुकान पर आसानी से अलग अलग नाम से मिल जाता है जो चटपटा होता है खाने में भी स्वादिष्ट है यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है जो पाचन क्रिया के साथ भूख को बढ़ाता है यह पेट की गैस का घरेलु उपचार रोचक चूरन है, यह पेट को ठीक करने का एक आयुर्वेदिक उपचार भी है  इस ब्लॉग पोस्ट के माद्यम से हम आज इस चूर्ण के ऊपर चर्चा करेंगे जिसमे समझगे की इसको कैसे तैयार करना है इसकी विधि यह घरेलु उपचार में कैसे उपयोगी है व् किसी मात्रा में लेना सही होगा 

  

रोचक चूर्ण औषदि :-

  • सौंफ -दो तोले
  • छोटी पीपली - दो  तोले ,
  • काली मिर्च -तीन तोले 
  • टाटरी(इमली का सत्व )- तीन तोले 
  • सफ़ेद जीरा -चार तोले 
  • सेंधा नामक -तेरहा तोले 
  • चीनी -तेरहा तोले 


कैसे तैयार करे :-

  • नमक, चीनी, टाटरी इन तीन चीज़ो की अलग अलग करके पीसे ले और कपडे से छान कर रख ले
  • फिर सौंफ, काली मिर्च, पीपली और जीरे को एक साथ कूट ले और उसको भी कपडे से छान ले 
  • उसके बाद उन सभी को एक साथ अच्छे से मिला ले 
  • और एक साफ़ सुथरी काच की शीशी में रख ले 

गुण:- 

  • स्वादिष्ट चूर्ण  - यह चूर्ण विशेष कर रूचि-उत्पादक है स्वादिष्ट होने के कारण बार-बार खाने को मन करता है 
  • पाचक - यह चूर्ण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पाचन में हेल्प करता है 
  • भूख - यह चूर्ण मन को प्रसन्नकर व् मुख की विरसता को ठीक करके भूख को बढ़ाता है 
  • पेट गैस - अगर भोजन के बाद इसकी एक निश्चित मात्रा ली जाये तो यह पेट में गैस को इकठा होने की शिकायत को दूर करता है     


मात्रा व् समय:- 

  • मात्रा - इस चूर्ण को एक से तीन माशे (1 से 3 ग्राम )तक लेना सही रहता है  
  • समय - भोजन के बाद दोनों वक्त सुबह शाम लेना सही रहेगा या कष्ट के समय इसका उपयोग करना चाहिए  



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. जले स्थान के लिए पारंपरिक मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज
  14. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  15. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  16.  पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज

अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज

अस्थमा के लिए घरेलू उपचार-धतूरा  एक रामबाण इलाज

अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज


अस्थमा एक ऐसी समस्या है जिसमें श्वास लेने में परेशानी होती है और यह जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। अधिकांश लोग अस्थमा के इलाज के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार भी इस समस्या को दूर करने में मदद कर सकते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम देखेंगे कि कैसे तूरा अस्थमा के उपचार में एक प्रमुख रामबाण इलाज साबित हो सकता है, जो अस्थमा का एक प्रमुख आयुर्वेदिक इलाज माना जाता है।

अस्थमा का परमानेंट इलाज - धतूरा का उपयोग


अस्थमा एक गंभीर श्वास-रोग है जो फेफड़ों की सूजन से होता है और सांस लेने में परेशानी पैदा करता है। यह समस्या अधिकतर एलोपैथिक दवाओं द्वारा नियंत्रित की जाती है, लेकिन आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार भी इसमें मदद कर सकते हैं। 



तूरा एक पौधा है जिसके पत्ते और फूलों में उपयोगी औषधि होती है। इसकी पत्तियां और बीज विभिन्न रोगों के उपचार में इस्तेमाल की जाती हैं, और अस्थमा के मरीजों के लिए यह एक अत्यधिक प्रभावी उपचार साबित हुआ है। तूरा में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी और ब्रोंकोडिलेटर प्रॉपर्टीज़ अस्थमा के लिए उपयुक्त होती हैं, जो फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद कर सकती हैं और सांस लेने में सुधार कर सकती हैं। एलर्जी से ग्रस्त अस्थमा के मरीजों के लिए भी तूरा एक उत्तम विकल्प हो सकता है। 



अस्थमा दूर करने का मंत्र विधि :-


धतूरे के पके ताजे फलों को मिटटी की हांडी में डालकर उसे ढकन के साथ बंद कर दें। इसके बाद हांडी को कपड़मिट्टी (वैद्यक में धातु या औषधि फूँकने के संपुट पर गीली मिट्टी के लेप के साथ कपड़ा लपेटने की क्रिया) करे और गजपुट (एक खढा जिसमें गीले गोबर से ढक कर आग जलाई इसको है) में फूंक झोंक दें। इससे एक ही बारी में धतूरे की काली भस्म बन जाएगी इसको है हिमदस्ते या खरल में कूट ले और कपड़े में छानकर रख लें। 



इसको कैसे ले:-


 इसे  1से 2 रति तक भस्म मिलाकर मधु या शहद के साथ लें। यह घरेलू नुस्खा अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता इसको यह निरंतर उपयोग से फेफड़ों की समस्याओं में सुधार लाता है और अस्थमा की अस्थायी समस्याओं को भी दूर करने में मदद कर सकता हैं 



इस प्राकृतिक उपचार को अस्थमा की समस्या से निपटने का एक समृद्ध और प्रभावी तरीका माना गया है। यह उपाय सिर्फ समस्या के संकेतों को दूर करने में मदद करता है बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुधारता है। अस्थमा के लिए आयुर्वेदिक उपचार की इस अद्वितीय विधि को आजमाएं और इसके लाभों को अनुभव करें।



ध्यान दें:-


 तूरा का इस्तेमाल करने से पहले एक चिकित्सक से परामर्श लें और उसके दिशा-निर्देशों का पालन करें। यह घरेलू नुस्खा केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के लिए है यदि आपको अस्थमा की समस्या है, तो तूरे के इस उपयोग से आपको लाभ हो सकता है। लेकिन इसे उचित गाइडेलाइंस के अनुसार करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसे आजमाएं और अस्थमा के लक्षणों में सुधार देखें। 


**अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - तूरा एक रामबाण इलाज**


धतूरे का अंधेरा पक्ष:-

जबकि धतूरा में निर्विवाद आकर्षण है, इसके अंधेरे पक्ष को स्वीकार करना आवश्यक है। इस पौधे में स्कोपोलामिन और एट्रोपिन जैसे ट्रोपेन एल्कलॉइड होते हैं, जो बड़ी मात्रा में सेवन करने पर मतिभ्रम, प्रलाप और यहां तक कि घातक विषाक्तता भी पैदा कर सकते हैं। अनगिनत चेतावनी देने वाली कहानियाँ इस शक्तिशाली वनस्पति के लापरवाह प्रयोग या दुरुपयोग से जुड़े खतरों की कड़ी याद दिलाती हैं।


नैतिक और कानूनी परिदृश्य को नेविगेट करना:-

इसके मनोवैज्ञानिक गुणों और नुकसान की संभावना के मद्देनजर, धतूरे की खेती, बिक्री और उपयोग दुनिया के कई हिस्सों में सख्त नियमों के अधीन हैं। ऐसे शक्तिशाली पदार्थों के जिम्मेदार उपयोग पर चर्चा करते समय नैतिक विचार भी सामने आते हैं, जो सूचित निर्णय लेने और नुकसान कम करने की रणनीतियों के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।


निष्कर्ष:-

धतूरा हर्बल दवा के क्षेत्र में एक आकर्षक पहेली बना हुआ है, जो इसके रहस्यों का पता लगाने की हिम्मत करने वालों को एक साथ आकर्षित और सावधान करता है। जबकि इसके मनोवैज्ञानिक गुणों और ऐतिहासिक महत्व को नकारा नहीं जा सकता है, इस पौधे को श्रद्धा, सम्मान और इसके संभावित जोखिमों और लाभों की गहरी समझ के साथ देखना महत्वपूर्ण है। 


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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
  3. पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार
  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
  5. मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार
  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
  8. बुखार के लिए घरेलु नुस्खा : एक अद्वितीय घरेलू उपचार
  9. जीरा चूर्ण: एक रामबाण घरेलु उपचार
  10. दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा
  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. जले स्थान के लिए पारंपरिक मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
  13. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज 
  14. पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
  15. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  16. पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा
  17. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज

सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज

सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज 
सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार रामबाण इलाज 

सिर दर्द एक आम समस्या है जो लगभग लोगो को हो ही जाती है चाहे तो वो काम की अधिकता के कारण, तनाव के कारण. अच्छी नींद न आने के कारण, खासी में, बुखार में, थकान में सिर दर्द हो जाता है कभी कभी दर्द इतना बड़ जाता है की सहन नहीं होता और कुछ लोगो में लगातार सिर दर्द होने से माइग्रेन की समस्या जन्म ले लेती है फिर न हमारे काम में हमारा इतना ध्यान जाता है और न ही मन को संतुष्टि मिलती है वैसे तो सिर दर्द के बहुत से घरेलू उपचार व् आयुर्वेदिक उपचार है जो आपको इंटरनेट के माद्यम से मिल जायेगे पर हम इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अलग अलग प्रकार के प्रचीन आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बात करेंगे जो एक प्रभावी, उपयोगी एक रामबाण इलाज है जिसका उपयोग बहुत पहले से होता आ रहा है और अब भी यह बहुत उपयोगी है

 तेजपात का डण्ठल से सिर दर्द का इलाज:-


औषधि :- 

  • तेजपात का डण्ठल ५ ग्राम ले 

क्या करना है :- 

  • तेजपात डण्ठलों को ले उसको पानी के साथ किसी सील या पत्थर पर बिलकुल महीन (बारीक) पीस कर रख ले  यह एक मात्रा है

उपचार  :-

  •  इसे सिर दर्द मीट जाता है 

उपयोग  :- 

  • सिर में जिस जगह दर्द हो रहा है वहाँ इसका मोटा लेप करना होता है लगभग आधे घंटे के बाद जब लेप सुख जाये तब उसको हटा ले 

नोट :-

दिहातों में यह उपचार सिर दर्द के समय व्यवाहर में लाया जाती है यह अब भी उतना ही सफल उपचार है  


 मुचकुन्द के फूल से सिर दर्द का इलाज:-

 औषधि:- 

  • मुचकुन्द के फूल १ तोला लगभग ११ ग्राम (अगर आप मुचकुन्द का पेड़ के बारे में नहीं जानते तो  इस ब्लॉग पोस्ट में नीचे व्यख्या दी गयी है  वहाँ से पढ़ कर आपको मुचकुन्द के पेड़ को पहचानने में आसानी होगी)

विधि :-

  •  मुचकुन्द के फूल को पानी के साथ बारीक़ पीस ले 

उपचार :- 

  • यह सिर दर्द का उपचार करता है 

उपयोग  :- 

  • सिर में जहा दर्द हो उस दर्द वाली जगह पर इसका मोटा लेप करना है
  •  लगभग आधे घंटे बाद सिर पर किया लेप जब थोड़ा गीला हो उसको दर्द वाले स्थान से हटा ले 
  • फिर से यही परिक्रिया सुरु करे यह एक दिन में दो से तीन बार करनी है 
  • फिर आपको अच्छा और सिर में ठंडक महसूस होगी 

नोट :-

 यह आयुर्वेदिक उपचार आयुर्वेदीय शार्गंधर, भावप्रकाश आदि मान्य ग्रंथो में से लिया गया है 

मुचकुन्द का पेड़

मुचकुन्द का पेड़ साखू की तरह बहुत बड़ा होता है इसके पत्ते भी साखू की तरह ही होते है बसंत से गर्मी की ऋतू तक इस पेड़ में फूल आते है और पेड़ो के नीचे परिपक़्व फूल गिरे मिलते है वर्षा ऋतू में इसके फूल ख़त्म हो जाते है इसके फूलो दो से तीन इंच लम्बे ,पीले खुरदरे ,रोमयुक्त और चम्पा के फूलो के जेसे तीन और से फाँकदार होते है फूलो से मीठी और मनमोहन गंध निकलती है यह महक फूलो के सूखने से भी ज्यों की त्यों बनी रहती है निघन्टुओं में इसे चरपरा ,कड़वा ,गर्म ,स्वर को उत्तम बनाने वाला कफनाशक, खासी, त्वचा के विकार, शोथ, सिर का दर्द, त्रिदोष, रक्तपित, पित और रक्तदोषनाशक लिखा है पर सिर पीड़ा में यह बहुत उपयोगी माना गया है 



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जले स्थान के लिए आयुर्वेदिक मलहम-एक रामबाण घरेलु उपचार

जले स्थान के लिए मलहम-रामबाण उपचार

जले स्थान के लिए मलहम:-

पारंपरिक उपचारों की दुनिया में, अनेकों खजाने हैं जो पीढ़ियों से हमें प्राप्त हुए हैं। भारत एक ऐसा देश है जहा हमेसा घरेलु नुस्खों जा उपयोग होता रहा है और आज की दुनिया भी आयुर्वेदिक उपचारो पर भरोसा करती आई है ऐसा ही एक खजाना है, जले स्थान के लिए मलहम का, जो एक घरेलु उपचार है जो सरल परंतु प्रभावी सामग्री का प्रयोग करके शांति और चिकित्सा प्रदान करता है। आज, हम एक पुरानी प्रसिद्धि की रेसिपी में गहराई से झाँकते हैं, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है जिसका सारा सामान आपके घर में ही मौजूद है ।


सामग्री:-

जले स्थान के लिए मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार


  • सेमल की रुई - 2.5 तोले (35 gram)
  • ारेड़ी का तेल (रेड़ी का तेल) - 2.5 तोले (35 gram)

विधि:-


कांसे की थाली में रेड़ी का तेल डालें।

सेमल की रुई को इसमें फ़ैला कर, हथेलियों से मलें।

मलहम का स्वरुप प्राप्त होने पर, मिश्रण को किसी साफ़ सुथरी शीशी में संग्रहित करें।

मलहम के फ़ायदे:-


मलहम का प्रयोग, जलने पर हुए स्थान पर, सुकून पहुंचाने में महत्वपूर्ण होता है।



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  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
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  11. दाद की लिए घरेलू उपचार
  12. सिर दर्द का आयुर्वेदिक उपचार -एक रामबाण इलाज
  13. अस्थमा के लिए घरेलू उपचार - धतूरा एक रामबाण इलाज
  14. अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
  15. अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय

मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार

 मंडूर का सिद्ध योग-एक रामबाण घरेलु उपचार

मंडूर का सिद्ध योग

 मंडूर बीस तोले (२३० ग्राम ) गन्ने का पुराना सिरका डेढ़ सेर(१४००ग्राम) आवला, बड़ी हर्र  और बहेड़ा दो दो तोले(२३ ग्राम)  मजीरा दो तोले(२३ग्राम) और गाय के दूध का दही एक सेर(९३० ग्राम) ले

 विधि

 एक लोहे की छोटी कड़ाही में तेज आंच पर मंडूर को तपाये जब वह लाल हो जाये तब उसे आधा सेर(४६५ग्राम) सिरके में बुझा दे पून: उसे सिरके से निकाल कर तप्त (गर्म )  करे इधर  मंडूर को बुझाये सिरके को अलग कर उतना ही दूसरा सिरका बुझाने वाले पात्र में रखे और लाल होने पर मंडूर उसमे डाल दें इसी क्रम में अलग-अलग सिरके में तीन बार बुझा चुकाने पर मंडूर की इमामदस्ते में कूटे और जल से चार पांच बार धो ले जब साफ़ जल निकलने लगे तब उसे सूखा कर कूटें और मोटे कपडे से छानकर एक लोहे की कड़ाही में रख ले फिर उसमे त्रिफला (आवला, हर्र और बहेड़ा) और मजीठ का कपड़छान किया चूरन का मिश्रण कर एक सेर(९२० ग्राम) दही डाल लोहे की मुसल से आठ घंटे तक घोटें जब मंडूर लेप की तरह बन जाये तब उसे सीसी या मीट्टी के ढक्कनदार  पात्र में रख ले


 गुण
बीमारी के बाद की कमजोरी में रामबाण घरेलु उपचार


 इसके सेवन से सग्रहणी, खून की कमी, प्रदर(Lucoreia), ऋतू की रूकावट, तीसरे प्रहर से कुछ कुछ हरारत  का होना, बीमारी के बाद की कमजोरी , तिल्ली और जिगर की खराबी तथा बच्चों के सूखे आदि का रोग दूर होता है 

 मात्रा

 तीन माशे(तीन ग्राम)  बारह से चार साल के लड़के को डेढ़ माशे(३/2 ग्राम) और उसे नीचे की उम्र के बच्चो को चार से दो रतीं (182 मिलीग्राम )तक


 अनुपान             

  • गाँये के दूध से तैयार अधबिलोया हुआ दही पांच से दस तोले (55  से 116 ग्राम )तक यह संग्रहणी, तिल्ली और जिगर का अनुपान है 
  •  प्रदर में चावल के धोवन और शहद से,
  •  ऋतु की रुकावट में काले तिल के पानी (दो तोले(23  ग्राम) काले तिल की आधा पाव जल में रात्रि में भगो दे सुबह मसलकर कपडे से छान जल ले ले ) 
  • हरारत के समय गर्म जल से 
  • रक्त-प्रदर में आड़हुल के फूलो के शरबत या शरबत नीलोफर के साथ दे।

 नोट

  •  तिल्ली और जिगर की खराबी में कुलथी की दाल का रस, परवल खेखसी, गुमे की पत्तियों का साग, बथुआ, सुरन और बालमखीरे का अर्क इत्यादी क्षार प्रधान द्रव्य को पथ्यरूप में लेना चाहिए और चीनी के स्थान पर शहद का प्रयोग करना चाहिए
  •  प्रदर में गूलर, कच्चे केले इत्यादी की तरकारी या भरता लेना लाभकारी होता है 
  • ऋतू की खराबी या रुकावट में राई की चटनी का भोजन के समय प्रयोग और गर्म पानी में  कपडे से पेडू पर सेक करना लाभकारी होता है 
  •   संग्रहणी में बकरी का दूध, मसूर की दाल का रस, पुराने लाल चावल का मड़गीला भात, मठ्ठा, आजवाइन, कालानमक, कच्चे बिल को आग में पका और उसमे थोड़ा एक साल पुराण गुड़ और एक मासा(एक ग्राम) के बराबर साथ का चूर्ण मिलाकर खाना तथा कच्चे केले की तरकारी इत्यादी लघु, पाचक, क्षरीय एवं ग्राही पथ्य उपयोगी है 
  •  खून की कमी में दूध, मुनक्का, मुंग, परवल, पुराने जोों और गेहू तथा शहद इत्यादी शरीर पोषक द्रव्य पथ्य है   ।॥।



  1. घरेलु नुस्खे क्या है 
  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
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  4. जोड़ों के दर्द की आयुर्वेदिक दवा
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  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
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गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान

 गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान


गेंहू का तेल, जिसे व्हीटजर्म ऑयल (Wheat Germ Oil) भी कहा जाता है, स्वास्थ्य और सुंदरता के लिए एक घरेलु उपचार है। यह तेल गेंहू के दानों के अंकुर से निकाला जाता है और इस घरेलु नुस्खे में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है। इस घरेलु नुस्खे में, हम गेंहू के तेल के फायदों, उपयोगों और इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने के तरीकों को समझेंगे और जानेगे की गेंहू के तेल कैसे सेहत और सुंदरता के लिए वरदान है  ।
गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान


गेंहू का तेल क्या है?


गेंहू का तेल गेंहू के बीज के अंकुर से प्राप्त होता है। यह एक गाढ़ा, सुनहरे रंग का तेल है जो विशेष रूप से विटामिन E, विटामिन A, विटामिन D, और कई अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गेंहू का तेल अपने अद्वितीय पोषण प्रोफाइल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण स्वास्थ्य और सुंदरता के क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है।

गेंहू के तेल के पोषक तत्व:-


गेंहू के तेल में निम्नलिखित प्रमुख पोषक तत्व होते हैं:

·         विटामिन E: यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा को पुनर्जीवित करता है और सेलुलर क्षति को कम करता है।

·         विटामिन A: यह त्वचा की मरम्मत और विकास में मदद करता है।

·         विटामिन D: यह हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए आवश्यक है।

·         ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड: ये स्वस्थ हृदय और मस्तिष्क कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

·         प्रोटीन और फाइबर: ये पोषण को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

गेंहू के तेल के फायदे


1. त्वचा के लिए फायदे


·         सूखी त्वचा: गेंहू का तेल त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है और सूखी त्वचा को राहत प्रदान                                       करता है।

           झुरिया : इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं और झुर्रियों को                             कम करते हैं।

·         स्किन रिपेयर: विटामिन E और अन्य पोषक तत्व त्वचा की मरम्मत करते हैं और स्कार्स, स्ट्रेच मार्क्स                                     और अन्य त्वचा समस्याओं को कम करते हैं।

·         प्राकृतिक ग्लो: गेंहू का तेल त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।

2. बालों के लिए फायदे


·         बालों का पोषण: गेंहू का तेल बालों को गहराई से पोषण देता है और उन्हें मजबूत बनाता है।

·         बालों का झड़ना : इसमें उपस्थित विटामिन और मिनरल्स बालों के झड़ने को कम करने में मदद करते                                           हैं।

·         स्काल्प स्वास्थ्य: गेंहू का तेल डैंड्रफ और सूखी स्काल्प को कम करने में मदद करता है।

3. स्वास्थ्य के लिए फायदे


·         हृदय स्वास्थ्य: गेंहू का तेल ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड्स से भरपूर होता है, जो हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।

·         प्रतिरक्षा प्रणाली: इसके पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं।

·         पाचन तंत्र: गेंहू का तेल पाचन तंत्र को सुधारता है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करता है।

·         वजन नियंत्रण: इसमें उपस्थित फाइबर वजन को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

गेंहू का तेल का उपयोग कैसे करें?
गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान


1. त्वचा पर उपयोग


·         मॉइस्चराइजर: गेंहू के तेल की कुछ बूंदें अपने चेहरे और शरीर पर मालिश करें। यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है।

·         फेस मास्क: गेंहू के तेल को अन्य प्राकृतिक सामग्रियों जैसे शहद, दही या एवोकाडो के साथ मिलाकर फेस मास्क बनाएं और त्वचा पर लगाएं।

·         स्किन रिपेयर: निशान या स्ट्रेच मार्क्स पर गेंहू का तेल नियमित रूप से लगाएं।

2. बालों पर उपयोग


·         हेयर ऑयल: बालों की जड़ों में गेंहू का तेल लगाएं और 30 मिनट तक छोड़ दें, फिर शैम्पू से धो लें।

·         हेयर मास्क: गेंहू के तेल को नारियल तेल और अंडे के साथ मिलाकर बालों पर लगाएं और 1 घंटे बाद धो लें।

3. आहार में शामिल करें


·         सलाद ड्रेसिंग: गेंहू के तेल को सलाद ड्रेसिंग में इस्तेमाल करें।

·         स्मूदी में मिलाएं: अपने स्मूदी में एक चम्मच गेंहू का तेल मिलाएं।

·         सप्लीमेंट: गेंहू के तेल के कैप्सूल भी बाजार में उपलब्ध हैं, जो आपको आसानी से अपने आहार में शामिल करने की सुविधा देते हैं।

गेंहू के तेल के उपयोग में सावधानियां


·         एलर्जी टेस्ट: गेंहू का तेल का उपयोग करने से पहले, एक पैच टेस्ट करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि                                      आपको इससे एलर्जी नहीं है।

·         अतिरिक्त सेवन से बचें: गेंहू का तेल अत्यधिक पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसलिए इसे सीमित मात्रा                                                 में ही सेवन करें।

·         गर्भवती महिलाएं: गर्भवती महिलाएं इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

निष्कर्ष


गेंहू का तेल एक प्राकृतिक और बहुपयोगी उत्पाद है जो आपकी सेहत और सुंदरता दोनों के लिए अत्यधिक फायदेमंद हो सकता है। इसके नियमित उपयोग से आप न केवल एक स्वस्थ त्वचा और बाल पा सकते हैं, बल्कि आपके संपूर्ण स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकता है। गेंहू के तेल को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और इसके अद्वितीय फायदों का आनंद लें।

यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें और अपने अनुभव हमारे साथ कमेंट में जरूर बताएं। स्वस्थ रहें, खुश रहें!



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  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
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  7. खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार
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खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार

 खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार 

खांसी एक सामान्य समस्या है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह समस्या सर्दी, जुकाम, एलर्जी या अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं के कारण हो सकती है। जबकि बाजार से आप खांसी के लिए कई प्रकार की दवाएं खरीद कर ले सकते हो, पर हम यहाँ घरेलु नुस्खे से बना खांसी पर काढ़ा जो एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार है जिसको, खांसी से राहत पाने के लिए अपने घर में कभी भी बना सकते हैं। काढ़ा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करके बनाया जाता है, जो खांसी को कम करने में मदद करते हैं और श्वसन तंत्र को आराम पहुंचाते हैं।

इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम, हम जानेंगे कि खांसी पर काढ़ा एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार को कैसे तैयार किया जाता है, इसके विभिन्न प्रकार और इसके फायदे

काढ़ा क्या है?
खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार

काढ़ा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक पेय है जिसे विभिन्न जड़ी-बूटियों और मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में किया जाता है, खासकर श्वसन तंत्र से संबंधित समस्याओं के लिएकाढ़ा न केवल खांसी और गले की खराश को शांत करता है बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है।

खांसी पर काढ़ा बनाने की विधि:-

आवश्यक सामग्री:

1. तुलसी के पत्ते (Basil leaves): 10-12 पत्ते

2. अदरक (Ginger): 1 इंच का टुकड़ा, कद्दूकस किया हुआ

3. काली मिर्च (Black pepper): 5-6 दाने

4. लौंग (Cloves): 2-3

5. दालचीनी (Cinnamon): 1 इंच का टुकड़ा

6. शहद (Honey): 1 चम्मच (स्वादानुसार)

7. पानी: 2 कप

बनाने की विधि:

1. पानी उबालें: एक पैन में 2 कप पानी डालें और इसे उबलने के लिए रखें।

2. जड़ी-बूटियाँ डालें: जब पानी उबलने लगे, तो उसमें तुलसी के पत्ते, अदरक, काली मिर्च, लौंग, और दालचीनी डालें।

3. उबालें: इस मिश्रण को धीमी आंच पर 10-15 मिनट तक उबालें, जब तक कि पानी आधा न हो जाए।

4. छानें: मिश्रण को छानकर एक कप में निकाल लें।

5. शहद मिलाएं: इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और अच्छी तरह से हिलाएं

आपका इस तरीके से खांसी के लिए काढ़ा तैयार हो जायेगा। इसको  धीरे-धीरे चुस्की लेकर पीना है । दिन में लगभग दो से तीन बार तक इसका सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है।

काढ़े के विभिन्न प्रकार:-

खांसी के उपचार के लिए कई प्रकार के काढ़े बनाए जा सकते हैं, जिनमें से कुछ लोकप्रिय प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. तुलसी-अदरक काढ़ा:

सामग्री: तुलसी के पत्ते, अदरक, शहद, काली मिर्च

लाभ: तुलसी और अदरक में एंटीबैक्टीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो खांसी और गले की सूजन को कम करते हैं।

2. हल्दी-दूध काढ़ा:

सामग्री: हल्दी, दूध, शहद

लाभ: हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो एक शक्तिशाली एंटीइंफ्लेमेटरी एजेंट है और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।

3. मुलैठी काढ़ा:

सामग्री: मुलैठी की जड़, अदरक, शहद

लाभ: मुलैठी गले की खराश और खांसी को शांत करने में मदद करती है और श्वसन तंत्र को आराम पहुंचाती है।

काढ़े के फायदे:-
खांसी पर काढ़ा: एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार

1. खांसी में राहत: काढ़ा गले की खराश और खांसी को शांत करता है। इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण संक्रमण को कम करते हैं।

2. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है: काढ़ा में उपयोग किए जाने वाले जड़ी-बूटियाँ और मसाले प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

3. श्वसन तंत्र को साफ करता है: काढ़ा बलगम को ढीला करता है जिससे बलगम को बाहर निकालने में मदद मिलती है और श्वसन तंत्र को साफ करता है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है।

4. आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार : काढ़ा एक आयुर्वेदिक उपाय है और इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते। यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सुरक्षित है।

खांसी से बचने के लिए अन्य उपाय

काढ़ा के साथ-साथ, खांसी से बचने के लिए कुछ और भी उपाय अपनाए जा सकते हैं:

1. हाइड्रेशन: पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं। इससे गले की सूखापन कम होती है और खांसी में राहत मिलती है।

2. नमी बनाए रखें: घर के अंदर नमी बनाए रखें, खासकर सर्दियों में। ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें या पानी के कटोरे को कमरे में रखें।

3. धूल और एलर्जेंस से बचें: धूल और एलर्जेंस से बचने के लिए नियमित रूप से सफाई करें और एलर्जी के कारणों से दूर रहें।

4. धूम्रपान से बचें: धूम्रपान से गले और फेफड़ों में जलन होती है, जिसके कारण खासी बनती है अगर खासी पहले से हो तो यह उसको बढ़ा सकती है।

5. गर्म तरल पदार्थ पिएं: गर्म सूप, हर्बल चाय और गर्म पानी पिएं। यह गले को शांत करता है और खांसी में राहत मिलती है।

निष्कर्ष

खांसी एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। इसके उपचार के लिए काढ़ा एक आयुर्वेदिक और घरेलु उपचार है। विभिन्न जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करके बनाए गए काढ़े न केवल खांसी में राहत देते हैं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करते हैं। खांसी के लिए काढ़ा बनाना आसान है और यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सुरक्षित है। नियमित रूप से काढ़ा का सेवन करने से आप खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं से बच सकते हैं।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और घरेलु नुस्खों के उपायों को अपनाना हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। खांसी के लिए काढ़ा एक ऐसा ही घरेलु नुस्खा है, जो आपको और आपके परिवार को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकता है। इस ब्लॉग पोस्ट में दिए गए काढ़े की विधि और उसके फायदे आजमाकर देखें और खांसी से राहत पा सकते है । अगर आपकी खांसी पुरानी या रुक नहीं रही है तो एक डॉक्टर को जरूर दिखाए और उपचार उनकी देख रेख में ही करे।  

यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें और अपने अनुभव हमारे साथ कमेंट में जरूर बताएं। स्वस्थ रहें, खुश रहें!



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  2. घरेलु व देशी उपचार के बारे में पढ़े
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  6. गेंहू का तेल: सेहत और सुंदरता के लिए एक वरदान
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